उत्तराखंड के उत्तरकाशी में एक रहस्यमयी घटना ने सबको चौंका दिया है। नैनीताल के रामनगर की रहने वाली 24 वर्षीय बबीता पांडे अपने दोस्तों के साथ छुट्टियां मनाने और ट्रैकिंग करने गई थीं, लेकिन वह दयारा बुग्याल ट्रेक से अचानक लापता हो गईं। 29 मई की आधी रात से उनका कोई सुराग नहीं मिल सका है। इस घटना के सामने आने के बाद से ही रेस्क्यू टीमें दिन-रात उनकी तलाश में जुटी हैं।
आखिर कौन है बबीता पांडे?
बबीता पांडे नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र (चिल्किया गांव) की रहने वाली हैं। 24 साल की बबीता एक एमबीए (MBA) छात्रा हैं और घर से ही एक निजी कंपनी के लिए ऑनलाइन काम करती हैं। 25 मई को वह अपने दो दोस्तों हरमनपाल और हरमनप्रीत के साथ उत्तरकाशी घूमने निकली थीं। पहले वे गंगोत्री गए और उसके बाद उन्होंने मशहूर दयारा बुग्याल ट्रेक पर जाने का प्लान बनाया।
29 मई की रात को आखिर क्या हुआ था?
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो मुताबिक, 29 मई की रात तीनों दोस्त ट्रेकिंग के दौरान ‘घोई’ (Ghoi) नामक एक कैंपसाइट (पड़ाव) पर रुके थे। बताया जा रहा है कि देर रात बबीता पांडे अचानक अपने टेंट से बाहर गईं और फिर कभी वापस नहीं लौटीं। जब काफी देर तक वह नहीं मिलीं, तो उनके दोस्तों ने वन विभाग और पुलिस को इसकी सूचना दी। मनेरी थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने बबीता के साथ आए दोनों दोस्तों और उनके गाइड से कड़ी पूछताछ शुरू कर दी है।
जांच में फर्जी परमिट का खुलासा
इस घटना के बाद जांच एजेंसियों के हाथ एक बड़ा फर्जीवाड़ा भी लगा है। पर्यटन विभाग की पड़ताल में पता चला है कि ‘एक्सप्लोर उत्तरकाशी’ (Explore Uttarkashi) के आधिकारिक सिंगल-विंडो पोर्टल पर बबीता पांडे के नाम से कोई भी ट्रेकिंग परमिट जारी ही नहीं हुआ था!
पुराने परमिट से छेड़छाड़: ट्रेकिंग एजेंसी ने एक पुराने और एक्सपायर हो चुके परमिट पर बबीता और उनके दोस्तों का नाम चिपका कर वन विभाग की चेकपोस्ट पर दिखाया था।
QR कोड से खुली पोल: जब इस परमिट का QR कोड स्कैन किया गया, तो उसमें पहले जा चुके किसी अन्य ट्रेकर्स के नाम सामने आए।
एजेंसी पर एक्शन: इस फर्जीवाड़े के कारण शुरुआत में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में भी काफी देरी हुई। फिलहाल पर्यटन विभाग ने उस ट्रेकिंग एजेंसी का रजिस्ट्रेशन तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया है।
अभी तक बबीता पांडे का नहीं मिला कोई सुराग
जैसे-जैसे समय बीत रहा है, परिजनों की चिंता खौफ में बदलती जा रही है। बेटी की तलाश में वे दर-दर भटकने को मजबूर हैं। इस बीच, दयारा बुग्याल ट्रेक के आसपास के जंगलों, घाटियों और खतरनाक रास्तों में एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF), आईटीबीपी (ITBP), आर्मी, वन विभाग और पुलिस की जॉइंट टीमें बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
इस ऑपरेशन में 150 से ज्यादा जवान, ड्रोन कैमरे और स्निफर डॉग्स की भी मदद ली जा रही है।प्रशासन अपनी पूरी ताकत लगा रहा है, लेकिन खराब मौसम और दुर्गम रास्तों के कारण बबीता पांडे को ढूंढने में भारी मुश्किलें आ रही हैं।




