जनपद उत्तरकाशी के सिल्याण गांव में मंगलवार को वैशाखी के पावन अवसर पर भगवान हरि महाराज को समर्पित पौराणिक दुधगाडू मेले का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान क्षेत्रभर से आए श्रद्धालुओं ने सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय को सिल्याण गांव में हरि महाराज के नाम से पूजा जाता है। गांव के ठीक ऊपर स्थित प्राचीन मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। वैशाखी के दिन यहां विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिनमें हरि महाराज और हूंण देवता का दुग्धाभिषेक किया जाता है। इसी परंपरा के कारण इस आयोजन को “दुधगाडू मेला” कहा जाता है।
मेले का सबसे आकर्षक और अलौकिक दृश्य तब देखने को मिला, जब हरि महाराज शिवम गुसांई पर तथा हूंण देवता शक्ति प्रसाद सेमवाल पर अवतरित हुए। इस दिव्य क्षण ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इसके साथ ही कंडार देवता और नाग देवता की डोलियों का पारंपरिक नृत्य हुआ। ढोल-दमाऊं की गूंज और भक्तों के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
हरि महाराज को बाड़ागढ़ी पट्टी का राजा भी माना जाता है। क्षेत्र के ग्रामीण और किसान गेहूं की फसल कटाई से पूर्व अच्छी पैदावार और समृद्धि की कामना करते हुए भगवान के दरबार में माथा टेकते हैं। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
दुधगाडू मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता और लोक आस्था का जीवंत उदाहरण है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी विरासत को संजोए हुए है।













