Vande Mataram Bill 2026 : बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 11 अगस्त 2026 को वंदे मातरम से जुड़े संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। ऐसे में देश के हर नागरिक को राष्ट्रगीत वंदे मातरम का उसी तरह सम्मान करना होगा, जैसे राष्ट्रगान जन-गण-मन का करना होता है।

वहीं सभी सरकारी कार्यक्रमों में जन-गण-मन के साथ-साथ वंदे मातरम का गायन होगा। इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से भी वंदे मातरम गाया जाएगा। पीएम की स्पीच से पहले वंदे मातरम के पूरे 6 स्टेंजा गाए जाएंगे। सरकार का कहना है कि यह फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसी साल वंदे मातरम गीत के 150 साल पूरे हो रहे है।

वंदे मातरम को लेकर शुरु हुई राजनीति

वंदे मातरम बिल पर साइन हो गया है, ऐसे में सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। लेकिन इसका विरोध भी शुरु हो गया है। वंदे मातरम को लेकर सबसे ज्यादा राजनीति महाराष्ट्र में हो रही है। इसी बीच के नेताओं का आरोप है कि सरकार मुसलमानों को परेशान करने के लिए जबरदस्ती वंदे मातरम को थोपना चाहती है। इसके पीछे देशप्रेम नहीं, बीजेपी का धार्मिक एजेंडा है।

हालांकि महाराष्ट्र के डिप्टी चीफ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे ने कहा कि ये हैरानी की बात है कि कुछ लोगों को राष्ट्रगीत में धर्म दिख रहा है। ऐसे लोगों को मजहबी चश्मा उतार कर देश के बारे में सोचना चाहिए। 

वहीं आदित्य ठाकरे ने एकनाथ शिंदे को जवाब देते हुए कहा कि वंदे मातरम इतना ही जरुरी है तो शिंदे को बीजेपी के नेताओं से पूछना चाहिए कि जब ये बिल पार्लियामेंट में पास हो रहा था तो प्रधानमंत्री और गृहमंत्री सदन में मौजूद क्यों नहीं थे।

नितेश राणे के बयान से मचा घमासान

महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने कहा कि कुछ मुस्लिम संगठनों ने ऐलान किया है कि मदरसों में वंदे मातरम नहीं गाया जाएगा, क्योंकि इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता है। इस पर नितेश राणे ने कहा कि जिन मदरसों को वंदे मातरम गाने से परहेज है, उनकी सरकारी फंडिंग रोक देनी चाहिए।

ऐसे में नितेश राणे के इस बयान पर महाविकास अघाडी के नेताओं ने नाराजगी जाहिर की। कांग्रेस के नेता नसीम खान ने कहा कि बीजेपी का देशप्रेम सिर्फ दिखावा है।