Pellet Gun Allegations : इन दिनों जंतर-मंतर पर चल रहे है कोकरोच जनता पार्टी के छात्रा प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन चलने को लेकर मामला तूल पकडता जा रहा है। इसे लेकर शुक्रवार को लोकसभा में सांसद ने पैलेट गन से घायल हुए पीडित साहिल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। 

लेकिन इस मामले में दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रकार की पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया है। ऐसे में यह मामला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में भीड में पैलेट गन कब इस्तेमाल की जाती है, आखिर क्या कहते है नियम। इन सब के बारे में विस्तार से जानते है।

आखिर क्या होती है पैलेट गन?

बता दें कि पैलेट गन एक एयरगन की तरह होती है। इसमें छोटे-छोटे लेड पैलेट नाम की गोली चलाई जाती है। मेटल से बनी छोटी सी एक गोली में करीब 100 से 150 छर्रे होते हे। जिसके छर्रे थोडी दूरी से चलाने पर बिखर जाते है, जो कि भीड में मौजूद लोगों को लग सकते है।

इसे फायर आर्म नहीं माना जाता है। इसके छर्रे शरीर के काफी अंदर तक नहीं घुसते है। जिससे जिंदगी को किसी भी प्रकार का खतरा नहीं होता। इसे एक लीथल हथियार के रुप में माना जाता है। पैलेट गन का इस्तेमाल सबसे पहले जम्मू-काश्मीर में 2010 की साल में किया गया था।

कब किया जाता है इसका इस्तेमाल

बता दें कि जब कहीं जमा भीड हिंसा पर अचानक से उतर जाए तो इसको दो तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। पहला तरीका यह है कि भीड को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाउडस्पीकर पर चेतावनी भी देनी होते है, फिर जमा भीड को अनलॉफुल असबेंली घोषित किया जाता है, जिसके बाद भी भीड ना हटे तो पानी की बौछार की जाती है।

फिर इसके बाद ओप्शन में लाठी चार्ज या फिर टियर गैस के सेल भी मौजूद होते है। इसमें भी पहले लोगों को मारकर डराकर भगाने की कोशिश की जाती है। अगर ये सारे उपाय फैल जाते है तब फिर पैलेट गन का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन वह भी कमर के नीचे का टार्गेट रखते हुए।