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मोहम्मद दीपक की आर्थिक हालत खराब, 5 महीने से नहीं भर पाए जिम का किराया, मकान मालिक ने दिया अल्टीमेटम

मेरा नाम मोहम्मद दीपक है' कहने वाले दीपक जिम का किराया भरने को मोहताज, मां की चाय की दुकान से चल रहा है घर!

Authored by: Bhupendra Panwar
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Published on: 27 May 2026, 7:50 am IST
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मोहम्मद दीपक की आर्थिक हालत खराब, 5 महीने से नहीं भर पाए जिम का किराया, मकान मालिक ने दिया अल्टीमेटम

उत्तराखंड के कोटद्वार से एक बेहद भावुक करने वाली खबर सामने आ रही है। अगर आप सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं, तो आपको 26 जनवरी 2026 का वो वायरल वीडियो जरूर याद होगा, जिसमें एक हिंदू युवक ने भीड़ के सामने खड़े होकर कहा था “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।” एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार की जान और दुकान बचाने वाले इस ‘रियल लाइफ हीरो’ का असली नाम दीपक कुमार है। लेकिन आज यह ‘मोहम्मद दीपक’ अपनी जिंदगी की सबसे मुश्किल लड़ाई लड़ रहा है। कभी अपने जिम में युवाओं को फिटनेस की ट्रेनिंग देने वाले दीपक आज पाई-पाई को मोहताज हो गए हैं और उनके पास अपने जिम का किराया भरने तक के पैसे नहीं बचे हैं।

आखिर क्यों आई ‘मोहम्मद दीपक’ पर आर्थिक तंगी?

दीपक कोटद्वार में ‘हल्क जिम’ (Hulk Gym) नाम से एक फिटनेस सेंटर चलाते हैं। विवाद से पहले उनके जिम में करीब 150 से 200 लोग आते थे और उनका बिजनेस काफी अच्छा चल रहा था। लेकिन जनवरी में हुए ‘बाबा’ दुकान विवाद के बाद स्थिति पूरी तरह से बदल गई।

  • ग्राहकों ने मोड़ा मुंह: विवाद के बाद कुछ संगठनों की कथित धमकियों और दबाव के चलते युवाओं ने दीपक के जिम में आना बंद कर दिया। आज उनके जिम में बमुश्किल 15 से 50 मेंबर ही बचे हैं।
  • बढ़ता गया जिम का किराया: दीपक के जिम का महीने का किराया करीब 40 हजार रुपये है। पिछले 5 महीनों से कमाई न होने के कारण उन पर 2 लाख रुपये से ज्यादा का किराया बकाया हो गया है।
  • बैंक का भारी लोन: दीपक के सिर पर 20 लाख रुपये का होम लोन भी है, जिसकी 17 हजार रुपये की मासिक EMI भी वो नहीं चुका पा रहे हैं।

मकान मालिक ने दिया अल्टीमेटम

हालत यह हो गई है कि मकान मालिक ने उन्हें जल्द से जल्द किराया चुकाने या फिर जिम खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया है। दीपक ने एक न्यूज़ चैनल को भावुक होते हुए बताया

मैंने कभी अपनी परेशानी किसी को नहीं बताई। मकान मालिक का भी नुकसान हो रहा है, वो अपनी जगह सही हैं। लेकिन मैं इतनी भारी मशीनें लेकर आखिर कहां जाऊं?

दीपक के परिवार में उनकी पत्नी, एक छोटी बच्ची और बुजुर्ग मां हैं। जिम से आमदनी ठप होने के बाद अब पूरे परिवार का पेट दीपक की मां की एक छोटी सी चाय की दुकान से पल रहा है। हालात से मजबूर होकर दीपक अब अपनी जिम मशीनें बेचने और किसी दूसरे शहर में जाकर एक मामूली ट्रेनर की नौकरी ढूंढने का विचार कर रहे हैं।

क्या सोशल मीडिया का सपोर्ट सिर्फ हवा-हवाई ?

जब दीपक का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ था, तो उन्हें पूरे देश से भारी समर्थन मिला था। बड़े-बड़े नेताओं से लेकर सुप्रीम कोर्ट के वकीलों तक ने उनकी हिम्मत की दाद दी थी। उस दौरान कई लोगों ने उनके जिम की ऑनलाइन मेंबरशिप भी ली थी।लेकिन जब असल जिंदगी में दीपक को मदद की जरूरत पड़ी, तो जमीनी हकीकत में वो बिल्कुल अकेले पड़ गए हैं। हालांकि, हाल ही में इस आर्थिक संकट की खबर बाहर आने के बाद आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने उन्हें अपनी सैलरी से 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद भेजी है, लेकिन कर्ज और किराये के बड़े पहाड़ के सामने यह मदद नाकाफी साबित हो रही है।

About the Author
Bhupendra Panwar
Bhupendra Singh Panwar is a dedicated journalist reporting on local news from Uttarakhand. With deep roots in the region, he provides timely, accurate, and trustworthy coverage of events impacting the people and communities of Uttarakhand. His work focuses on delivering verified news that meets high editorial standards and serves the public interest.
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