Asaduddin Owaisi on Vande Mataram : बता दें कि राष्ट्रीय अपमान के संशोधन विधेयक 2026 संसद से पारित हो गया। लेकिन AIMIM के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बड़ा बयान दिया है और इसका विरोध किया है।

ओवैसी ने कहा है कि, 'मैं एक मुस्लिम हूं औऱ अल्लाह के सिवा किसी की भी इबादत नहीं करता। अगर मैं किसी और की इबादत करुंगा तो अपने मजहब के खिलाफ हो जाउंगा।' वहीं ओवैसी ने आरोप लगाया है कि वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने की कोशिश संविधान में मिले धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन है।

ओवैसी ने बताया 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम' में अंतर

असदुद्दीन ओवैसी ने बताया कि जब 'जन गण मन' गाया जाता है तो उसमें देश और उसके लोगों का सम्मान दिखाई देता है, वहीं जब'वंदे मातरम' गाया जाता है तो उसमें देवी-देवताओं की आराधना का भाव शामिल है। उनके अनुसार दोनों की पकृति अलग है और इन्हें एक समान नहीं माना जा सकता।

औवेसी के अनुसार 1950 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा देने के मामलें में बडी गलती थी। इसके लिए संसद में कोई औपराचिक प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था। वहीं संविधान में कहीं भी 'राष्ट्रीय गीत' की स्पष्ट परिभाषा नहीं है।

औवेसी ने दिया संविधान के अनुच्छेदों का हवाला

असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार इस विधेयक के जरिए संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन कर रही है। उनके अनुसार किसी भी व्यक्ति को उसकी धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध कोई कार्य करने के लिए बाधित नहीं किया जा सकता।

संसद में वंदे मातरम को लेकर छिडी है बहस

असदुद्दीन ओवैसी के वंदे मातरम पर बयान के बाद राष्ट्रीय गीत की संवैधानिक स्थिति औऱ धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अब इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष औऱ विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और बढने की संभावना है।