Uttarakhand News: देहरादून-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-7) के चौड़ीकरण के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की प्रस्तावित कटाई का स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने विरोध शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए हजारों साल पुराने पेड़ों को काटना पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

बताया जा रहा है कि भानियावाला से रानीपोखरी के बीच हाईवे चौड़ीकरण परियोजना के तहत बड़ी संख्या में साल के पेड़ों की कटाई की योजना बनाई गई है। इसी के विरोध में स्थानीय निवासी, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोग लगातार आवाज उठा रहे हैं।

प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि साल के घने जंगल इस क्षेत्र की प्राकृतिक पहचान हैं। ये पेड़ न केवल स्वच्छ हवा और हरियाली प्रदान करते हैं, बल्कि भूजल संरक्षण, वन्यजीवों के आवास और स्थानीय जलवायु को संतुलित बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका कहना है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होती है तो इसका असर आने वाले वर्षों में पर्यावरण, जैव विविधता और लोगों के जीवन पर साफ दिखाई देगा।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सड़क चौड़ीकरण परियोजना के विरोध में नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे विकास कार्य भी पूरे हों और अधिक से अधिक पेड़ों को बचाया जा सके। उनका सुझाव है कि परियोजना की डिजाइन और निर्माण योजना की दोबारा समीक्षा की जाए ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी इंतजार किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि न्यायालय का फैसला क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण और विकास परियोजना के बीच संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।