Neha Bohra Koun Hai: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान जेएनयू की शोधार्थी और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई हैं। लंबे समय तक चली भूख हड़ताल और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें आंदोलन का प्रमुख चेहरा बना दिया है।

अभी तक उपलब्ध जानकारियों के अनुसार नेहा बोरा ने अपने साथियों के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। बताया गया कि उन्होंने 23 दिनों तक अन्न ग्रहण नहीं किया। इस दौरान उनकी सेहत लगातार बिगड़ती रही और चिकित्सकों ने स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिमों को लेकर चेतावनी भी दी। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखा।

नेहा बोरा का उत्तराखंड से है नाता 

करीब 29 वर्षीय नेहा बोरा मूल रूप से उत्तराखंड से हैं। उनके बचपन का एक हिस्सा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में बीता, जहां उन्होंने दिल्ली पब्लिक स्कूल, सिलीगुड़ी से स्कूली शिक्षा प्राप्त की।

इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातक किया। आगे की पढ़ाई आंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली से पूरी की। वर्तमान में वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में पीएचडी के तीसरे वर्ष की शोधार्थी हैं।

रंगमंच और सामाजिक अध्ययन से जुड़ाव ने उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व और संवाद शैली को मजबूत बनाया। छात्र राजनीति में सक्रिय होने के बाद वे आइसा से जुड़ीं और बाद में संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनी गईं।

जंतर-मंतर आंदोलन में नेहा बोरा की भूमिका

जंतर-मंतर पर शुरू हुआ छात्र आंदोलन पेपर लीक, परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, बेरोजगारी और छात्रों से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर आयोजित किया गया। आंदोलन की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग शामिल रही। नेहा बोरा ने अपने साथियों मनीष कुमार और आमीन अमितोज के साथ भूख हड़ताल की। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन के दौरान उनके साथ अनशन पर बैठे।

आंदोलन के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस ने बल प्रयोग किया। उन्होंने यह भी कहा कि छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे हैं। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

आखिर वर्तमान में क्यों चर्चा में नेहा बोरा ?

नेहा बोरा की पहचान केवल एक छात्र नेता तक सीमित नहीं है। वे समाजशास्त्र की विद्यार्थी, रंगमंच से जुड़ी कार्यकर्ता और जेएनयू की शोधार्थी हैं। जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान उनकी लंबी भूख हड़ताल और लगातार सार्वजनिक सक्रियता ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।

आंदोलन की मुख्य मांगें पेपर लीक पर रोक, निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, शिक्षा को अधिक सुलभ बनाना और छात्रों के साथ संवाद स्थापित करना रही हैं। फिलहाल आंदोलन और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर घटनाक्रम जारी है।