उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के स्यानाचट्टी में एक बार फिर प्राकृतिक आपदा का खतरा मंडरा रहा है। गुरुवार को कुपडागाड़ बरसाती नाले से भारी मात्रा में आए मलबे ने यमुना नदी के प्रवाह को रोक दिया, जिससे नदी में एक झील बन गई है। इस स्थिति ने स्थानीय प्रशासन और निवासियों में हड़कंप मचा दिया है। सुरक्षा के मद्देनजर स्यानाचट्टी गांव को पूरी तरह खाली करवा लिया गया है, और लगभग 150 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

मलबे से यमुना नदी में बनी झील

जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम कुपडागाड़ से आए मलबे ने यमुना नदी के प्रवाह को अवरुद्ध कर दिया, जिससे सड़क के नीचे बने होटलों और मकानों में पानी भर गया। पानी का स्तर इतना बढ़ गया कि यह पुल के ऊपरी हिस्से तक पहुंच गया। अगर यह झील टूटती है, तो स्यानाचट्टी गांव को भारी नुकसान होने का खतरा है।

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उत्तरकाशी की पुलिस अधीक्षक सरिता डोभाल ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की गई। आसपास के सभी मकानों और होटलों को खाली करवाकर 150 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। इसके साथ ही, ओजरी, पूजारगांव, पाली, खरादी और कुथनोर जैसे नजदीकी गांवों को भी सतर्क कर दिया गया है। स्थानीय निवासियों से यमुना नदी के किनारे न जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है।

मौके पर बड़कोट के उपजिलाधिकारी, राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), पुलिस, अग्निशमन सेवा, सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग की टीमें तैनात हैं। ये टीमें स्थिति पर नजर रख रही हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

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पहले भी हो चुका ऐसा हादसा

यह पहला मौका नहीं है जब स्यानाचट्टी में इस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई है। इससे पहले, 28 जून 2025 को बादल फटने के कारण कुपडागाड़ से भारी मलबा बहकर आया था, जिसने यमुना नदी के प्रवाह को रोककर एक झील बना दी थी। उस समय भी स्थानीय होटलों की निचली मंजिलों तक पानी पहुंच गया था, जिससे लोगों में दहशत फैल गई थी। बाद में मशीनों की मदद से मलबा हटाए जाने के बाद झील का पानी धीरे-धीरे कम हुआ था।