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हम दो, हमारे तीन”: मोहन भागवत का बयान-हर परिवार में होने चाहिए तीन बच्चे

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हाल ही में जनसंख्या और समाज से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल और युवा देश में केवल “हम दो, हमारे दो” की सोच से आगे बढ़कर अब “हम दो, हमारे तीन” की ओर सोचने की ज़रूरत है।

हम दो, हमारे तीन आखिर क्यों बोले मोहन भागवत

मोहन भागवत के मुताबिक, वर्तमान समय में भारत की आबादी का अनुपात और बदलते सामाजिक हालात को देखते हुए केवल दो बच्चों का नियम लंबे समय तक देश के हित में नहीं रहेगा। उनका मानना है कि अगर परिवार सिर्फ दो बच्चों तक सीमित रहेगा, तो आने वाले समय में जनसंख्या संतुलन बिगड़ सकता है।

RSS प्रमुख ने यह भी कहा कि किसी भी देश के विकास और स्थिरता के लिए जनसंख्या संतुलन बेहद ज़रूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत में अगर जन्म-दर लगातार घटती रही तो आने वाले दशकों में स्थिति यूरोप जैसी हो सकती है, जहां जनसंख्या घटने से कई देशों के सामने श्रमिक और सामाजिक संतुलन की समस्या खड़ी हो रही है।

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भागवत ने कहा कि दो बच्चे पालने जितना कठिन नहीं है, तीन बच्चों का दायित्व भी परिवार निभा सकता है। उनका कहना है कि भारतीय परिवार प्रणाली और सांस्कृतिक मूल्यों में बड़े परिवार को हमेशा सकारात्मक नजरिये से देखा गया है।

शुरू हुई बहस

हालांकि इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। जहां कुछ लोग इस विचार का समर्थन कर रहे हैं, वहीं कई लोग इसे व्यवहारिक रूप से कठिन बता रहे हैं। खासकर, आज की आर्थिक स्थिति को देखते हुए बड़े परिवार पालना हर किसी के लिए आसान नहीं माना जाता।

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Bhupendra Panwar

Bhupendra Singh Panwar is a dedicated journalist reporting on local news from Uttarakhand. With deep roots in the region, he provides timely, accurate, and trustworthy coverage of events impacting the people and communities of Uttarakhand. His work focuses on delivering verified news that meets high editorial standards and serves the public interest.

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