वर्तमान दौर में युवा अधिकतर अच्छी नौकरी और अच्छी तनख्वाह का सपना देखते हैं, लेकिन उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के दशोली गांव निवासी प्रदीप पाठक ने अलग राह चुननी पसंद की और मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़कर स्वरोजगार शुरू किया और आज प्रदेश के युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गए हैं।

पिथौरागढ़ के प्रदीप पाठक के MBA किया और फिर अलग-अलग कंपनियों में नौकरी की लेकिन फिर उन्होंने कुछ अलग करने की ठानी और वापस पहाड़ की और लौट आए।

प्रदीप पाठक ने अपनाया स्वरोजगार का रास्ता 

प्रदीप पाठक ने मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़कर सीधे उत्तराखंड लौट आए और स्वरोजगार का रास्ता चुना। उनका लक्ष्य था हिमालयी जैविक उत्पादों को देशभर में पहचान दिलाना तथा प्रदेश के युवा को स्वरोजगार जोड़ना।

हालांकि यह राह जितनी आसानी लग रही थी उतनी थी नहीं लेकिन प्रदीप पाठक ने हार नहीं मानी और हिलसम डाटकाम नाम से एक आनलाइन प्लेटफार्म शुरू कर पूरे भारत में अपने प्रोडक्ट बेचने शुरू कर दिए। उनकी मेहनत रंग लाई और मात्र दो साल में उनके जैविक उत्पादों को अच्छी पहचान मिल गई। 

युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत 

मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़कर स्वरोजगार करने का फैसला प्रदीप पाठक के लिए इतना आसान नहीं था। लेकिन उनके इरादे और मेहनत ने यह साफ कर दिया कि मुश्किल भी कुछ नहीं है। आज ना वह केवल स्वयं स्वरोजगार चला रहे बल्कि अन्य युवाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित कर रहे। 

प्रदीप पाठक ने युवाओं को एक बेहतर संदेश देने की कोशिश की है। प्रदीप का कहना है कि नौकरी के पीछे भागने से बेहतर है कि अपने आस-पास के संसाधनों को पहचानो और हिमालयी जैविक उत्पादों में बहुत संभावनाएं हैं। यदि युवक मेहनत और सही इरादों से स्वरोजगार करें तो जिंदगी बेहतर हो सकती है।