पिथौरागढ़: कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 को लेकर उत्तराखंड में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। जिला प्रशासन के अनुसार यात्रा का पहला दल 4 जुलाई को उत्तराखंड पहुंचेगा। इस वर्ष कुल 500 श्रद्धालु लिपुलेख दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर की यात्रा करेंगे।

इस बार यात्रा में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में काफी कम पैदल चलना होगा। सड़क संपर्क बेहतर होने से यात्रा का अधिकांश हिस्सा वाहन से तय किया जाएगा, जिससे बुजुर्ग और अन्य श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी। बुधवार को पिथौरागढ़ में हुई समीक्षा बैठक में प्रशासन, सेना, आईटीबीपी, बीआरओ और अन्य विभागों ने यात्रा तैयारियों का जायजा लिया।

अधिकारियों ने बताया कि यात्रा मार्ग पर सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, संचार व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। मानसून को देखते हुए भूस्खलन संभावित क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। मार्ग पर मशीनें और राहत दल तैनात रहेंगे ताकि किसी भी बाधा की स्थिति में यात्रा प्रभावित न हो। कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) भी यात्रियों के लिए परिवहन और ठहरने की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे रहा है।

प्रशासन का कहना है कि इस बार श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और बेहतर यात्रा अनुभव देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हिंदू धर्म में कैलाश मानसरोवर यात्रा को आस्था और आध्यात्मिक साधना का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। ऐसे में हजारों श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा की शुरुआत का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।