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उत्तराखंड में राशनकार्ड धारकों को मिली राहत, ई-केवाईसी अधूरा रहने पर भी नहीं रुकेगा राशन वितरण

Authored by: Bhupendra Panwar
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Published on: 22 November 2025, 6:49 pm IST
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उत्तराखंड में राशनकार्ड धारकों को मिली राहत, ई-केवाईसी अधूरा रहने पर भी नहीं रुकेगा राशन वितरण

Dehradun News:  राशन वितरण की नई ई-केवाईसी व्यवस्था को लेकर उत्तराखंड के लाखों राशनकार्ड धारकों में व्याप्त चिंता को देखते हुए सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि 30 नवंबर की समय-सीमा के बाद भी किसी का राशन नहीं रोका जाएगा। अंगूठे का निशान या रेटिना स्कैन न हो पाने की वजह से जिन कार्डधारकों की ई-केवाईसी अभी तक पूरी नहीं हो पाई है, उन्हें पूरा-पूरा राशन मिलता रहेगा। यह जानकारी कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने दी।

खाद्य एवं रसद विभाग के उच्च अधिकारियों के मुताबिक, जिन घरों के मुखिया नौकरी या अन्य कारणों से घर पर मौजूद नहीं रह पाते, या जो अत्यधिक वृद्ध हैं या गंभीर रूप से बीमार हैं, उनके लिए विशेष छूट के प्रावधान किए गए हैं। विभाग ने इस संबंध में सभी जिला पूर्ति अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं कि किसी भी पात्र लाभार्थी को राशन से वंचित न किया जाए।

उत्तराखंड में राशनकार्ड धारकों को मिली राहत

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने बताया कि कि ई-केवाईसी की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए 30 नवंबर के बाद भी अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इसके लिए अलग से कैंप लगाए जाएंगे और घर-घर जाकर भी ई-केवाईसी पूरी करने की व्यवस्था की जा रही है।

रोकना और सही लाभार्थी तक राशन पहुंचाना है, न कि किसी गरीब को परेशान करना। इसलिए किसी भी स्थिति में राशन वितरण पर रोक नहीं लगेगी। राशन कार्डधारकों से अपील की गई है कि वे इस सूचना को अपने मोहल्ले, गांव और परिचितों तक जरूर पहुंचाएं ताकि कोई भी व्यक्ति अनावश्यक तनाव में न रहे। अगर फिर भी किसी दुकानदार द्वारा राशन देने में आनाकानी की जाए तो तुरंत टोल-फ्री नंबर 1967 या 1800-1800-150 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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Bhupendra Panwar
Bhupendra Singh Panwar is a dedicated journalist reporting on local news from Uttarakhand. With deep roots in the region, he provides timely, accurate, and trustworthy coverage of events impacting the people and communities of Uttarakhand. His work focuses on delivering verified news that meets high editorial standards and serves the public interest.
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