पौड़ी गढ़वाल के मरोड़ा गांव में एक वीडियो ने सोशल मीडिया को हिला दिया है। 23 साल की युवा ग्राम प्रधान वीरा रावत और 75 साल के बुजुर्ग के बीच विवाद का वीडियो तेजी से वायरल हुआ। फिर थाने में बुजुर्ग ने उनके पैर छूकर माफी मांगी वो वीडियो भी वायरल। लोग पूछ रहे हैं, आखिर हुआ क्या? युवा प्रधान सही थी या बुजुर्ग का सम्मान टूटा? चलिए सरल भाषा में पूरी घटना और सच्चाई जानते हैं।
वीरा रावत कौन हैं? Gen-Z प्रधान की कहानी
वीरा रावत (जिन्हें विरमा, बिरमा या विरा रावत भी लिखा जाता है) उत्तराखंड के पौड़ी जिले के थलीसैंण ब्लॉक की मरोड़ा ग्राम पंचायत की ग्राम प्रधान हैं। मात्र 23 साल की उम्र में पिछले साल पंचायत चुनाव जीतकर वे गांव की पहली महिला प्रधान बनीं।
गांव वाले उन्हें “Gen-Z प्रधान” कहते हैं। पद संभालते ही उन्होंने गांव में शराबबंदी लागू कर दी। उनका कहना था “नशा गांव की तरक्की का सबसे बड़ा दुश्मन है।” इसके अलावा वे सड़क, पानी, स्कूल और डिजिटल विकास जैसे कामों में लगी हुई हैं। युवा होने की वजह से कुछ लोग उन्हें नजरअंदाज नहीं कर पा रहे और उनके चरित्र पर निराधार अफवाहें फैला रहे थे।
12 मई 2026 को क्या हुआ? घटना की पूरी डिटेल
12 मई 2026 की शाम करीब 6:30 बजे वीरा रावत गांव में निरीक्षण के लिए गई हुई थीं। तभी उन्हें पता चला कि गांव का एक 75 साल का बुजुर्ग दूसरे गांवों में उनके बारे में गलत बातें फैला रहा है “प्रधान लड़कों के साथ घूमती है”, “चरित्र खराब है” जैसी अफवाहें। वीरा ने शांति से उनसे पूछा और समझाया, “प्रधान होने के नाते जब अधिकारी आते हैं तो मुझे उनके साथ गांव घुमाना पड़ता है। यह मेरी जिम्मेदारी है, इसमें गलत कुछ नहीं।” लेकिन बुजुर्ग भड़क गए। उन्होंने वीरा का हाथ पकड़ लिया, खींचा और गौशाला की तरफ ले जाने की कोशिश की। बार-बार कहते रहे “चल तुझे गौशाला के अंदर लेके जाता हूँ।”
वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। पुलिस ने दोनों को थाने बुलाया। वहां बुजुर्ग ने लिखित माफी मांगी। माफी मांगते हुए उन्होंने वीरा रावत के पैर भी छू लिए। यह फोटो और वीडियो भी वायरल हो गया। हालांकि वीरा रावत ने साफ कहा मैंने किसी से पैर छूकर माफी मांगने के लिए नहीं कहा। अचानक हुआ। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग ने माफी के बाद भी दोबारा धमकाने की कोशिश की थी।
वीरा रावत का पूरा बयान
वीरा ने फेसबुक पर वीडियो जारी कर बताया कि मैं गांव के विकास के लिए लगी हूं। शराबबंदी का फैसला लिया तो कुछ लोग नाराज हैं। लेकिन चरित्र पर हमला बर्दाश्त नहीं करूंगी। उन्होंने आगे कहा, गांव लौटकर विकास कार्य जारी रखूंगी, लेकिन ग्रामीण समाज की सोच में बदलाव की जरूरत है।
