सोशल मीडिया पर पिछले कई दिनों से वायरल हो रहे चंपावत में कथित सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। प्रशासन ने दावा किया कि जांच में दुष्कर्म की कोई पुष्टि नहीं हुई।
जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा अधिकारी की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नाबालिग युवती ने कोर्ट में दिए बयान में दुष्कर्म की घटना की पुष्टि नहीं की। पुलिस के मुताबिक, युवती ने बताया कि दबाव में आकर उसने रेप का आरोप लगाया था।
पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने पूरे मामले को सुनियोजित षड्यंत्र बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य कमल रावत ने राजनीतिक रंजिश के चलते इस मुद्दे को हवा दी।
पुलिस का कहना है कि कमल रावत ने युवती के परिवार की कमजोर आर्थिक और सामाजिक स्थिति का फायदा उठाया। युवती की मां पहले ही गुजर चुकी हैं और पिता लंबे समय से बीमार चल रहे हैं। आरोप है कि पिता के इलाज का लालच देकर परिवार को इस मामले में इस्तेमाल किया गया।
जांच के दौरान सबसे अहम बात ये रही कि मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की कोई पुष्टि नहीं हुई। युवती के शरीर पर न चोट के निशान मिले, न ही कोई घाव या संघर्ष के सबूत। ये तथ्य पुलिस के शक को और मजबूत करते हैं कि पूरा मामला फर्जी तरीके से रचा गया था।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन छानबीन में जुटी हुई है। सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी है।
अपडेट: इस खबर को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है। सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों पर प्रशासन ने साफ किया कि बिना तथ्यों के किसी भी खबर को फैलाने से पहले जांच रिपोर्ट का इंतजार करें।
