SC On Vehicle Insurance : मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत पेट्रोल पंपों पर ईंधन की सप्लाई को गाडियों के इंश्योरेंस स्टेटस से जोडने का प्रस्ताव रखा गया है। इस प्रोजेक्ट के अनुसार मोटर व्हीकल एक्ट के तहत जरुरी थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के नियमों का पालन बेहतर बनाना है।
अब इंश्योरेंस कराना होगा रिन्यू?
बता दें कि जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को निर्देश दिया है कि वह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साथ मिलकर एक पायलट सिस्टम तैयार करें।
इस सिस्टम के तहत, जिन भी गाडियों का इंश्योरेंस वैलिड नहीं है, उन्हें पेट्रोल या डीजल देने से मना किया जा सकता है, जब तक कि उनका इंश्योरेंस रिन्यू न हो जाए।
पेट्रोल पंप नहीं देगा पेट्रोल-डीजल
कोर्ट के अनुसार अगर वैध बीमा ना हो तो संबंधित गाडी को पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं मिलेगा। इस फैसले के अनुसार दो मकसद है। पहला यह है कि इससे बिना बीमा या बिना रजिस्ट्रेशन वाली गाडियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। वहीं दूसरा यह है कि ईंधन भरवाने के लिए बीमा का जरुरी होना, यह गाडी मालिकों को वैध बीमा कवरेज बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
अब थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस सबके लिए होगा जरुरी
कोर्ट ने कहा है कि इस तरह के सिस्टम से मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 146 के तहत कानूनी जरुरत को लागू करने में मदद मिलेगी। वहीं सभी गाडियों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस जरुरी है।
कोर्ट ने आगे कहा कि इस प्रोजेक्ट को ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों के इस्तेमाल से लागू किया जा सकता है। वहीं पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक रुप से कोई आपत्ति नहीं है।

