MDR Charges On UPI : संसद में वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स बिल, 2027 पेश किया है। इस नए बिल से सरकार को यह अधिकार मिल जाएगा कि वह भविष्य में तय कर सके कि किन डिजिटल पेमेंट्स को फ्री रखना है और किन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी प्रोसेसिंग चार्ज लगाना है।
बता दें कि एमडीआर वह फीस है जो दुकानदार डिजिटल पेमेंट की सुविधा के लिए बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटर्स और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देते है। रिजर्व बैंक के अनुसार एमडीआर फ्रेमवर्क को रेगुलेट करता है। जनवरी 2020 से सरकार ने डिजिटल पेमेंट को तेजी से अपनाने के लिए यूपीआई और रुपये डेबिट कार्ड ट्रांजेक्शन पर जीरो एमडीआर जरुरी कर दिया है।
इससे आम जनता पर क्या असर पड सकता है?
नए नियम लागू होने से एक आम व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। यानी आम लोगों के लिए UPI पहले की तरह फ्री ही रहेगा। इस पर कोई चार्ज नहीं है।
यह नया नियम केवल दुकानदारों औऱ व्यापारियों पर लागू होगा, इसमें ग्राहकों का कोई रोल नहीं है। हालांकि कारोबारी इस खर्च को खुद उठा सकते है या प्रोडक्ट की कीमत तय करके आगे बढा सकते है।
आखिर कितना लगेगा चार्ज?
बता दें कि 2000 रुपए से अधिक बडे मर्चेंट ट्रांजेक्शन और बडे शॉरुम या स्टोर्स पर ही यह चार्ज लागू किया जाएगा। यह चार्ज 0.25% से 0.30% तय हो सकता है। इसका मतलब दुकानदार को 1000 रुपए के भुगतान पर करीब 2.50 रुपए से 3 रुपए का चार्ज देना पड सकता है।
सरकार क्यों करना चाहती है बदलाव?
जैसा कि आप जानते है कि सरकार ने जनवरी 2020 में UPI पर लगने वाले चार्ज खत्म कर दिए थे। लेकिन अब पेमेंट ऐप्स और बैंकों का कहना है कि बिना किसी कमाई के इतनी बडी व्यवस्था को चलाना मुश्किल काम है।
वहीं देश में हर महीने 23 अरब से ज्यादा UPI लेन-देन हो रहा है। ऐसे में सर्वर, इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर औऱ साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए कंपनियों को भारी फंड की जरुरत है।
एक अनुमान के अनुसार डिजिटल पेमेंट कंपनियों को सालाना लगभग 13000 करोड रुपए का राजस्व मिल सकता है। जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।

