Bharatnet Project Audit : जैसा कि आप जानते ही होंगे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'डिजिटल इंडिया' अभियान के तहत देश के हर गांव तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाने का सपना देखा गया था और इसको सच करने के लिए 'भारतनेट' योजना की घोषणा की गई थी।
लेकिन अब पीएम मोदी के इस प्रोजेक्ट पर सवाल उठाए जा रहे है। दरअसल संसद की एक कमेटी ने भारतनेट प्रोजेक्ट में कमियां बताते हुए कहा है कि कहां काम अटका हुआ है, यह जानने और हर गांव तक इंटरनेट पहुंचाने के लिए प्रत्येक राज्य और काम करने वाली एजेंसियों की जांच होनी चाहिए।
इस योजना के तहत इंटरनेट का ढांचा और लाइनें बिछाए गए हैं, लेकिन वास्तव में जिन गांवों में इंटरनेट चालू और काम कर रहा है, उनकी संख्या तय किए गए लक्ष्य से काफी कम है। योजना के तहत केबल बिछ गई है, लेकिन जितने गांवों तक इंटरनेट पहुंचना था, अभी तक उतने गांव में इंटरनेट पहुंचा नहीं है।
अभी तक 78,999 ग्राम पंचायतों तक पहुंची भारतनेट की सुविधा
टेलीकम्युनिकेशन डिपार्टमेंट की ओर से कमिटी को दी गई जानकारी के अनुसार 28 फरवरी, 2026 तक देशभर की लगभग 2.64 लाख ग्राम पंचायतों में से 78,999 ग्राम पंचायतों में भारतनेट के पॉइंट्स ऑफ प्रेजेंस काम कर रहे थे। बता दें कि PoP एक लोकल नेटवर्क पॉइंट होता है, जहां से घरों, संस्थानों और दूसरे यूजर्स तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी बढाई जा सकती है।
केबल बिछाई गई, लेकिन कई गांवों में इंटरनेट अब भी नहीं पहुंचा
कमेटी ने विभाग से कहा है कि वह 'भारतनेट' योजना की पूरी जांच करे कि किस राज्य औऱ किस मॉडल में कितना काम हुआ है औऱ इस काम में आ रही रुकावटों को पहचानकर उन्हें जल्द से जल्द दूर करें।
विभाग ने समिति को बताया है कि 28 जनवरी, 2026 तक इस प्रोग्राम के तहत 7.19 लाख किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी थी।

