AI Surveillance in Protest : हाल में ही जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्धारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले फैशियल रिकग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस की मानें तो इस सिस्टम के जरिए 2900 लोगों की पहचान की गई है, जिनमें हत्या, डकैती, रैप और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों के अपराधी भी शामिल थे।

इस फेशियल रिकग्निशन सिस्टम के कैमरों की मदद से शामिल चेहरों को स्कैन किया गया। फिर मोजूद क्रिमिनल डेटाबेस पर सर्च किया गया, जिससे पुराने रिकॉर्ड वाले लोगों की पहचान की जा सके।

2900 लोगों की हुई सिस्टम के जरिए पहचान

पुलिस ने बताया कि AI सिस्टम के जरिए प्रदर्शन के जंतर-मंतर और उसके आस-पास मौजूद लोगों को स्कैन किया। जिसमें करीब 2900 ऐसे लोगों की पहचान की गई, जिनका सिस्टम में आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज था। वहीं 2873 लोगों की और बारीकी से जांच करने पर पता लगा कि 989 लोगों पर पहले से आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें हत्या, डकैती, रेप और अपहरण जैसे गंभीर मामले थे।

ऐसे में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान इस काम का मकसद सुरक्षा का जायजा लेना था। ताकि भीडभाड वाले समय में होने वाले खतरों या गडबडी की पहचान पहले से की जा सके।

सुरक्षा बनाए रखना था मकसद

पुलिस ने कहा कि इस टेक्नोलॉजी की मदद से वॉन्टेड लोग, अपराधियों की पहचान करना था। साथ ही इससे बडी भीड पर बेहतर ढंग से नजर रखने में भी मदद मिली। उन्होंने कहा कि सिस्टम द्धारा पहचान किए जाने का मतलब दोषी ठहराया जाना या प्रदर्शन के दौरान किसी भी अपराध शामिल होना नहीं है।

अब टेक्नोलॉजी पर बढी है निर्भरता

AI फेशियल रिकग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल यह दिखाता है कि बडी सभाओं के दौरान भीड को संभालने और लोगों की सुरक्षा के लिए अब टेक्नोलॉजी पर निर्भरता बढी है। यह सिस्टम मैन्युअल वेरिफिकेशन के मुकाबले तेजी से पहचान करने में मदद करता है।

लेकिन चेहरा पहचान करने वाली तकनीक के इस्तेमाल से लोगों के अधिकारों के लिए काम करने वालों की चिंता बढ गई है। उनका कहना है कि इससे लोगों की प्राइवेसी और शांति से विरोध करने की आजादी पर असर पडता है।