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गढ़वाल में आज कमर्शियल वाहनों का चक्का जाम: परिवहन महासंघ की मांगें अधूरी, विरोध तेज

Authored by: Bhupendra Panwar
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Published on: 29 अक्टूबर 2025, 6:57 पूर्वाह्न IST
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गढ़वाल में आज कमर्शियल वाहनों का चक्का जाम: परिवहन महासंघ की मांगें अधूरी, विरोध तेज

उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में आज सभी कमर्शियल वाहनों का चक्का जाम रहेगा। उत्तराखंड परिवहन महासंघ के आह्वान पर यह विरोध प्रदर्शन हो रहा है, जिसमें ड्राइवरों और वाहन मालिकों ने अपनी लंबित मांगों को पूरा करने के लिए सड़कों पर उतरने का फैसला किया है।

महासंघ के अनुसार, 27 अक्टूबर को परिवहन सचिव के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक में परिवहन कारोबारियों की छह प्रमुख मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन सबसे अहम मांग, गढ़वाल क्षेत्र के सभी जिलों में ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटर (एटीएस) शुरू करने पर कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं मिली। इसके अलावा, ऋषिकेश स्थित एआरटीओ कार्यालय में भी एटीएस की स्थापना के बारे में परिवहन सचिव ने स्पष्ट जवाब देने से इनकार कर दिया।

गढ़वाल में आज रहेगा चक्का जाम

इन कारणों से परिवहन कारोबारियों ने पहले से घोषित चक्का जाम कार्यक्रम को बरकरार रखा है। महासंघ के अध्यक्ष सुधीर राय ने बताया, “हमारी मांगें पूरी न होने तक हम पीछे नहीं हटेंगे। टीजीएमओ (ट्रांसपोर्ट गढ़वाल मोटर ऑपरेटर्स) कार्यालय में सभी कमर्शियल वाहनों की यूनियनों के साथ बैठक हो चुकी है। इस बैठक में चक्का जाम को पूरी तरह सफल बनाने की रणनीति तैयार की गई है।”

यह विरोध प्रदर्शन गढ़वाल के प्रमुख जिलों जैसे देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी और चमोली में देखने को मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि एटीएस की कमी से वाहनों की फिटनेस जांच में देरी हो रही है, जो न केवल कारोबारियों के लिए नुकसानदेह है, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का विषय है। महासंघ ने सरकार से अपील की है कि जल्द से जल्द इस मुद्दे का समाधान निकाला जाए, ताकि यातायात व्यवस्था पटरी पर लौट सके।

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Bhupendra Panwar
Bhupendra Singh Panwar is a dedicated journalist reporting on local news from Uttarakhand. With deep roots in the region, he provides timely, accurate, and trustworthy coverage of events impacting the people and communities of Uttarakhand. His work focuses on delivering verified news that meets high editorial standards and serves the public interest.
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