रुड़की के भाजपा पार्षद मनीष बोलर गिरफ्तार, गैंग से जुड़े होने का आरोप
राजनीति और अपराध की दुनिया में एक बार फिर हलचल मच गई है। नगर निगम रुड़की के भाजपा पार्षद मनीष बोलर को उत्तराखंड एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि वे कुख्यात प्रवीण वाल्मीकि गैंग के सक्रिय सदस्य हैं और करोड़ों की संपत्ति हड़पने की साजिश में शामिल थे। यह गिरफ्तारी गुरुवार शाम को मोबाइल लोकेशन के आधार पर की गई, जब एसटीएफ की टीम ने उन्हें सुशील रोड पर एक पेट्रोल पंप के पास घेर लिया।
प्रवीण वाल्मीकि, जो इस गैंग का मुख्य सरगना है, फिलहाल सितारगंज जेल में बंद है। एसटीएफ के मुताबिक, मनीष बोलर लंबे समय से इस गैंग से जुड़े हुए थे और जेल से आने वाले आदेशों पर काम कर रहे थे। हाल ही में गैंग ने कई लोगों से रंगदारी मांगी थी, जिसमें कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स भी शामिल थे। जांच में पता चला कि रुड़की के सुनेहरा गांव में श्याम बिहारी नाम के व्यक्ति की मौत के बाद उनकी करोड़ों रुपये की संपत्ति को फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनाकर हड़पने की कोशिश की गई। एसटीएफ ने बताया कि तमंचे के बल पर यह सब किया जा रहा था।
मनीष बोलर पर एक साथी पंकज अष्टवाल के साथ मिलकर संपत्ति हड़पने का भी आरोप है। पुलिस को खुफिया जानकारी मिल रही थी कि वे गैंग की अवैध गतिविधियों में लगे हुए हैं। बोलर खुद एक हिस्ट्रीशीटर हैं, यानी उनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है।
भाजपा पार्षद मनीष बोलर गिरफ्तार
गिरफ्तारी की खबर फैलते ही रुड़की में हंगामा मच गया। सफाई कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया क्योंकि मनीष बोलर वाल्मीकि समुदाय से हैं और प्रवीण वाल्मीकि के भतीजे बताए जा रहे हैं। भाजपा ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया। एसटीएफ अधिकारियों ने कहा कि बोलर से पूछताछ जारी है और जल्द ही और खुलासे हो सकते हैं। पुलिस अलर्ट मोड पर है ताकि कोई अनहोनी न हो।
रुड़की के भाजपा पार्षद मनीष बोलर को STF ने प्रवीण वाल्मीकि गैंग से जुड़े होने और रंगदारी के मामले में गिरफ्तार किया। हिस्ट्रीशीटर रहे बोलर पर अवैध गतिविधियों और करोड़ों की संपत्ति के फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनाने का आरोप है। जिसे अब पार्टी से निकाला गया। pic.twitter.com/nEkviOxFVJ
यह घटना उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकती है। भाजपा पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है, और अब अपराध से जुड़े नेता का नाम आने से सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोग कहते हैं कि ऐसे मामलों से आम आदमी का विश्वास टूटता है। क्या यह सिर्फ एक गिरफ्तारी है या बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश? आने वाले दिनों में देखना होगा।