बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान के उत्तराखंड के पवित्र धामों से लंबे समय से गहरा संबंध रहा है। खासकर केदारनाथ धाम उनके लिए सिर्फ एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि एक खास जगह बन गया है। लेकिन अब चारधाम यात्रा 2026 से पहले एक नया विकास सामने आया है जिसने फैंस के साथ-साथ उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।
सारा अली खान का केदारनाथ से पुराना नाता
सारा अली खान की फिल्म ‘केदारनाथ’ के जरिए उत्तराखंड से उनका कनेक्शन शुरू हुआ। 2018 में रिलीज हुई इस फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्होंने केदारनाथ धाम की भव्यता और कठिनाई दोनों को करीब से देखा। उसके बाद से वह लगभग हर साल यहां दर्शन करने पहुंचती रही हैं। सोशल मीडिया पर भी वह अक्सर केदारनाथ की तस्वीरें शेयर करती हैं और अपनी श्रद्धा व्यक्त करती हैं। कई लोग उन्हें केदारनाथ की बड़ी फैन मानते हैं।
क्या कहता है नया नियम और BKTC का बयान
बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने हाल ही में देहरादून में मीडिया से बात करते हुए एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में गैर-सनातनियों को दर्शन के लिए एफिडेविट देना होगा। इस एफिडेविट में उन्हें सनातन धर्म में अपनी आस्था जतानी होगी।द्विवेदी ने सारा अली खान का नाम लेते हुए स्पष्ट रूप से कहा, “अगर सारा अली खान सनातन धर्म में अपनी आस्था रखती हैं और एफिडेविट देंगी तो उन्हें दर्शन की अनुमति दी जाएगी।
क्या पड़ेगा उत्तराखंड टूरिज्म पर असर
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ लोग इस नियम को मंदिरों की गरिमा और परंपरा बनाए रखने का सही कदम बता रहे हैं। वहीं सारा के फैंस इसे थोड़ा सख्त मान रहे हैं। उत्तराखंड के पर्यटन विभाग के लिए भी यह मसला अहम है क्योंकि बॉलीवुड सितारों की यात्राएं राज्य की छवि को पूरे देश में फैलाती हैं। नया नियम मुख्य रूप से उन लोगों को लक्षित है जिनकी आस्था पर सवाल उठता है। अभी यह देखना बाकी है कि सारा अली खान इस शर्त को मानती हैं या नहीं। चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले यह मुद्दा और स्पष्ट होता दिख रहा है।
फिलहाल सारा की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे पवित्र स्थलों पर आस्था सबसे महत्वपूर्ण है। नया नियम चाहे कितना भी विवादास्पद क्यों न हो, इसका मकसद मंदिरों की पवित्रता बनाए रखना ही लगता है। सारा अली खान जैसी हस्तियों की यात्रा भविष्य में भी उत्तराखंड के धामों को आकर्षित करती रहेगी, बस थोड़ी शर्तों के साथ।













