नेहा जोशी के बाद अब केदारनाथ धाम में वीआईपी (VIP) प्रोटोकॉल और बीकेटीसी (BKTC) के बिल को लेकर चल रहे विवाद में केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक बिल में अपना नाम सामने आने के बाद विधायक ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे धाम को बदनाम करने की साजिश करार दिया है।
विधायक आशा नौटियाल ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस बिल की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली। उन्होंने कहा, “2002 से एक जनप्रतिनिधि के रूप में मैं निरंतर केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर वहाँ जाती रही हूँ। मैंने आज तक कभी भी मंदिर समिति को कोई पत्र नहीं लिखा जिसमें वीआईपी प्रोटोकॉल या किसी विशेष व्यवस्था की मांग की गई हो।” उन्होंने बताया कि धाम में उनके कई परिचित हैं और वे हमेशा एक आम श्रद्धालु की तरह व्यक्तिगत रूप से वहाँ जाकर उन्हीं के यहाँ ठहरती हैं।
BKTC बिल पर विधायक आशा नौटियाल का स्पष्टीकरण
विधायक ने अपने नाम से जारी हुए बिल पर हैरानी जताते हुए कहा कि जब उन्होंने कभी किसी सुविधा की मांग ही नहीं की, तो यह बिल उनके नाम पर कैसे और क्यों बना। उन्होंने आश्वासन दिया है कि वे इस पूरे मामले की गहन जाँच और समीक्षा करेंगी कि आखिर यह बिल किसने दिया और क्यों लिया गया।
केदारनाथ के नाम पर ना हो राजनीति
आशा नौटियाल ने धाम को लेकर हो रही राजनीति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने इसे बाबा केदार के धाम को बदनाम करने का एक राजनीतिक षड्यंत्र बताया। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की है कि केदारनाथ धाम आस्था का सर्वोच्च केंद्र है, इसलिए यहाँ दर्शन करने के लिए केवल शुद्ध और श्रद्धा के भाव से ही आना चाहिए।
