आज शनिवार 28 मार्च 2026 की रात उत्तराखंड में एक घंटे का ब्लैकआउट रहेगा लेकिन चिंता की इसमें कोई बात नहीं क्योंकि यह कोई बिजली संकट या फॉल्ट नहीं, बल्कि सरकार की अपील पर Earth hour मनाने के लिए है। रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक पूरे प्रदेश में गैर-जरूरी लाइटें और विद्युत उपकरण बंद रखने की अपील की गई है। क्या आप भी इस छोटे से प्रयास से पर्यावरण को बचाने में साथ देंगे?
उत्तराखंड में ब्लैकआउट, Blackout in Uttarakhand
उत्तराखंड सरकार ने भारत सरकार और WWF India के आह्वान पर ये फैसला लिया है। सचिवालय से जारी अपील में साफ कहा गया है कि इस एक घंटे के दौरान सड़कों की सजावटी लाइटें, घरों की अनावश्यक बल्ब, एसी, हीटर, टीवी और दूसरे गैर-जरूरी उपकरण बंद रखें। अस्पताल, पुलिस, फायर ब्रिगेड और जरूरी सेवाओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
अर्थ आवर क्या है what is Earth hour ?
अर्थ ऑवर दुनिया भर का सबसे बड़ा पर्यावरण अभियान है। 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर से शुरू हुआ ये कार्यक्रम अब 190 से ज्यादा देशों में मनाया जाता है। इस साल ये अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। जिसका मकसद साफ है, ऊर्जा बचाना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य बनाना।
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में जहां बिजली ज्यादातर हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से आती है, वहां इस अभियान का खास महत्व है। हाल के दिनों में बिजली की मांग बढ़ने और कुछ प्लांट्स के मेंटेनेंस की वजह से कई जगहों पर रोस्टर्स चल रहे हैं। ऐसे में सरकार की ये अपील ऊर्जा बचत की दिशा में अहम कदम है।
आम जनता से सरकार की यह अपील
मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा विभाग ने सभी जिलाधिकारियों, नगर निगमों और पंचायतों को निर्देश दे दिए हैं। देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार, ऋषिकेश समेत सभी बड़े शहरों में सरकारी भवनों की लाइटें बंद रहेंगी। प्रशासन ने लोगों से कहा है अपने घर, दुकान और ऑफिस में सिर्फ जरूरी लाइट जलाएं, बाकी सब बंद कर दें।
विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष earth hour के दौरान हजारों मेगावाट बिजली बचती है। उत्तराखंड में अगर ज्यादातर लोग शामिल हुए तो लाखों यूनिट बिजली बच सकती है। इससे न सिर्फ बिल कम होगा, बल्कि कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा।
उत्तराखंड में यह ब्लैकआउट असल में उम्मीद की किरण है। अगर हम सब मिलकर छोटे-छोटे कदम उठाएं तो उत्तराखंड का पर्यावरण और बिजली व्यवस्था दोनों मजबूत होंगी। कल सुबह जब लाइट जलेंगी तो ये पता चलेगा कि एक घंटे के अंधेरे ने कितना उजाला बिखेरा। आप भी शामिल हों, क्योंकि बदलाव की शुरुआत अपने घर से ही होती है।













