उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में चल रही संविदा-आउटसोर्स के माध्यम से चल रही भर्ती पर सख्ती दिखाते हुए बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में सभी विभागों में भर्ती केवल नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से ही की जाएंगी। इस कदम को पारदर्शिता और युवा हित में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तराखंड में संविदा-आउटसोर्स भर्ती पर रोक
सरकारी सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों से कई विभागों में संविदा या आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति की जा रही थी। इससे न केवल प्रतिभाशाली युवाओं को अवसरों से वंचित रहना पड़ रहा था, बल्कि कई बार कार्य की गुणवत्ता और जवाबदेही पर भी सवाल उठते रहे हैं।
पारदर्शिता और समान अवसर पर जोर
शासन ने स्पष्ट किया है कि अब हर पद के लिए उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) या संबंधित चयन आयोग की नियमित प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चयन पूरी तरह से योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर हो।
एक अधिकारी ने बताया कि नई नीति के बाद अब विभागों को किसी भी पद के लिए सीधे अनुबंध या आउटसोर्सिंग के जरिए भर्ती करने से पहले शासन की मंजूरी लेनी होगी। इस नियम से मनमानी नियुक्तियों पर रोक लगेगी और राज्य के युवाओं को निष्पक्ष अवसर मिलेगा।
युवाओं में उम्मीद की नई किरण
इस निर्णय से बेरोजगार युवाओं में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। लंबे समय से नियमित भर्तियों की राह देख रहे उम्मीदवारों का कहना है कि इससे योग्यता पर आधारित भर्ती व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। कई युवा इस फैसले को “भविष्य के लिए भरोसे का संकेत” मान रहे हैं।
शासन निकट भविष्य में भर्तियों की निगरानी के लिए एक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम भी लागू करने की तैयारी में है, ताकि हर पद के लिए प्रक्रिया पारदर्शी और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहे। इससे भर्ती विवादों में भी कमी आने की संभावना है।