उत्तराखंड के कोटद्वार में एक छोटा-सा जिम चलाने वाले दीपक कुमार इन दिनों सुर्खियों में हैं। वजह? उन्होंने एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार का साथ दिया और खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ कह डाला। बस यही बात कुछ लोगों को चुभ गई। नतीजा, उनके जिम का आर्थिक बहिष्कार शुरू हो गया। पहले जहां 150 लोग रोज पसीना बहाते थे, अब मुश्किल से 15 बचे हैं। सोचिए, इंसानियत दिखाने की क्या कीमत चुकानी पड़ रही है?
जानिए क्या है पूरा मामला
दरअसल, बात 26 जनवरी 2026 की है। कोटद्वार में ‘बाबा गारमेंट्स’ नाम की दुकान चलाने वाले बुजुर्ग मुहम्मद अहमद पर कुछ लोग दबाव डाल रहे थे कि दुकान का नाम बदल लो। तर्क था कि नाम में ‘बाबा’ हिंदू संतों से जुड़ा लगता है, इसलिए भ्रम होता है। इसी बीच दीपक कुमार वहां पहुंचे। दीपक खुद हिंदू हैं, बॉडी बिल्डर हैं और शहर में ‘हल्क जिम’ चलाते हैं।
वीडियो में साफ दिखता है, दीपक ने भीड़ से कहा, “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है। मैं मुस्लिम हूं।” उनका मकसद था कि धार्मिक आधार पर किसी को परेशान न किया जाए। वीडियो वायरल हुआ और दीपक रातोंरात ‘मोहम्मद दीपक’ बन गए। लेकिन यह स्टैंड उन्हें महंगा पड़ गया।
मोहम्मद दीपक के वायरल वीडियो के बाद क्या हुआ?
वीडियो सोशल मीडिया पर फैलते ही विवाद शुरू हो गया। कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने इसे ‘सेक्युलरिज्म की बीमारी’ करार दिया। हिंदू रक्षा दल जैसे संगठनों ने विरोध जताया और कुछ ने तो धमकी तक दे डाली। दीपक बताते हैं, “मैंने सिर्फ इंसानियत के लिए आवाज उठाई। मुझे नहीं पता था कि इसका इतना बड़ा नुकसान होगा।
मोहम्मद दीपक के जिम में बचे केवल 15 सदस्य
इसके बाद लोगों ने उनके जिम से मुंह मोड़ लिया। कई सदस्यों ने सदस्यता कैंसल कर दी। जो पहले रोज आते थे, वे अब डरते हैं कि कहीं उन्हें भी निशाना न बना लिया जाए। दीपक अकेले कमाने वाले हैं। जिम का महीने का किराया 40 हजार रुपये, घर का लोन 16 हजार। अब आय इतनी कम हो गई है कि बेटी का स्कूल भी छुड़वाना पड़ सकता है।
सबसे बड़ा झटका तो व्यवसाय को लगा है। दीपक कहते हैं, “पहले जिम में रौनक रहती थी। लड़के-लड़कियां, बड़े-बुजुर्ग सब आते थे। अब सुबह-शाम सन्नाटा रहता है।” स्थानीय लोगों में डर है। कोई खुलकर साथ नहीं दे रहा।
हालांकि कुछ लोग दीपक की हिम्मत की तारीफ भी कर रहे हैं। CPI(M) नेता जॉन ब्रिटास ने तो उनके जिम में जाकर सदस्यता तक ले ली। उन्होंने कहा, “यह बहादुरी का मामला है। ऐसे लोगों को समर्थन मिलना चाहिए।” सोशल मीडिया पर भी कुछ लोग #StandWithDeepak जैसे हैशटैग चला रहे हैं। फिर भी हकीकत यही है कि आर्थिक बहिष्कार ने दीपक की जिंदगी मुश्किल कर दी है।
दीपक अभी हार नहीं मान रहे। वे कहते हैं, “अगर जिम बंद भी हो गया तो कोई बात नहीं। मैंने गलत नहीं किया।” लेकिन सवाल यह है कि क्या समाज ऐसे स्टैंड को समर्थन देगा? क्या दीपक को नए सदस्य मिलेंगे या बहिष्कार और बढ़ेगा?