Uttarakhand Weather Update:- उत्तराखंड के लोग इन दिनों आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि कब बादल बरसेंगे या पहाड़ों पर बर्फ की चादर बिछेगी। लेकिन भारतीय मौसम विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट ने सबकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अगले एक सप्ताह तक उत्तराखंड में न बारिश की संभावना है और न ही ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी। मौसम पूरी तरह सूखा और साफ रहेगा। फरवरी का महीना आधा बीत चुका है, फिर भी सर्दी की वो रौनक गायब है जिसके लिए उत्तराखंड मशहूर है।
इस समय पूरे राज्य में धूप खिली हुई है। मैदानी इलाकों जैसे देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में दिन का तापमान 24-26 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जो सामान्य से 4-5 डिग्री ज्यादा है। रात का पारा भी 10-12 डिग्री के आसपास बना हुआ है। वहीं पहाड़ी जिलों चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी में दिन में 18-20 डिग्री तक गर्मी महसूस हो रही है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री जैसे ऊंचे क्षेत्रों में भी बर्फबारी नहीं हुई है। वहां सिर्फ पुरानी बर्फ पिघल रही है। लोग पूछ रहे हैं, आखिर इस बार सर्दी कहां गायब हो गई?
उत्तराखंड मौसम को लेकर IMD की अपडेट
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) इस बार उत्तराखंड को छू भी नहीं रहा। आमतौर पर जनवरी-फरवरी में 3-4 पश्चिमी विक्षोभ आते हैं जो बारिश और बर्फबारी लाते हैं, लेकिन इस सीजन में सिर्फ एक कमजोर विक्षोभ आया था जनवरी के शुरू में। IMD देहरादून के निदेशक डॉ. रोहित थपलियाल ने कहा, “उत्तर भारत पर उच्च दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, जिसके कारण नमी वाले बादल आगे नहीं बढ़ पा रहे। अगले 7-10 दिन तक यही स्थिति बनी रहेगी। 28 फरवरी तक बारिश या बर्फबारी की कोई संभावना नहीं दिख रही।
पिछले साल फरवरी में राज्य को औसतन 40-50 मिमी बारिश मिली थी और ऊंचाई वाले इलाकों में 30-40 सेमी बर्फ गिरी थी। इस बार अब तक सिर्फ 5-8 मिमी बारिश ही दर्ज हुई है। यानी 85-90% की कमी।
बिना बारिश-बर्फबारी के क्या पड़ेगा असर ?
सबसे ज्यादा निराशा पर्यटन उद्योग में है। फरवरी में औली, चोपता, मुनस्यारी जैसे जगहों पर बर्फबारी देखने के लिए हजारों सैलानी आते हैं। इस बार होटल खाली पड़े हैं। औली के एक होटल मालिक ने बताया, “पिछले साल इस समय 90% बुकिंग थी, इस बार मुश्किल से 20%। लोगों का पहला सवाल ही यही होता कि बर्फ है क्या? जवाब न में सुनकर कैंसल कर देते हैं।”
कृषि पर भी चिंता बढ़ रही है। रबी फसल गेहूं, सरसों, मसूर को फरवरी में नमी की जरूरत होती है। किसान सिंचाई पर निर्भर हो गए हैं। जल स्रोत सूख रहे हैं। कई गांवों में पीने के पानी की किल्लत शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मार्च में भी बारिश नहीं हुई तो गर्मियों में पानी का संकट और गहरा सकता है।
फिलहाल तो सूखा ही राज्य पर छाया रहेगा। लेकिन मौसम वैज्ञानिकों को मार्च के पहले सप्ताह में एक-दो पश्चिमी विक्षोभ की उम्मीद है। अगर वो सक्रिय हुए तो कुछ राहत मिल सकती है। लंबे समय में जलवायु परिवर्तन का असर भी साफ दिख रहा है। सर्दियों में बारिश-बर्फबारी कम हो रही है, गर्मी बढ़ रही है।