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उत्तराखंड: परिवार रजिस्टर में नाम जुड़वाना अब नहीं रहेगा आसान, नई नियमावली के लिए कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव

Authored by: Bhupendra Panwar
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Published on: 5 जनवरी 2026, 8:25 पूर्वाह्न IST
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उत्तराखंड: परिवार रजिस्टर में नाम जुड़वाना अब नहीं रहेगा आसान, नई नियमावली के लिए कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव

उत्तराखंड में परिवार रजिस्टर (कुटुंब रजिस्टर) में नाम जोड़ने की प्रक्रिया अब पहले जैसी आसान नहीं रहेगी। राज्य में पिछले कुछ सालों से परिवार रजिस्टर में हो रही अनियमितताओं और फर्जीवाड़े की शिकायतों को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। सरकार नई नियमावली बनाने की तैयारी कर रही है, और इसके लिए जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा।

मुख्यमंत्री धामी ने हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के कई इलाकों में, खासकर सीमावर्ती और मैदानी जिलों जैसे देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, पौड़ी के कोटद्वार क्षेत्र, टिहरी के मुनिकीरेती और चंपावत के बनबसा-टनकपुर जैसे जगहों में जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ रहा है। इसका मुख्य कारण अवैध बसावट और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराना बताया जा रहा है।

उत्तराखंड परिवार रजिस्टर में नाम जोड़ना नहीं होगा आसान

सीएम धामी ने बैठक में साफ निर्देश दिए कि वर्ष 2003 से जनवरी 2026 तक के सभी परिवार रजिस्टरों की गहन और निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा मिला, तो दोषी अधिकारियों और आवेदकों के खिलाफ सख्त विभागीय व कानूनी कार्रवाई होगी। साथ ही, सभी जिलों में मौजूद परिवार रजिस्टर की प्रतियां तुरंत जिलाधिकारियों (डीएम) के पास सुरक्षित रखी जाएंगी, ताकि किसी तरह की छेड़छाड़ न हो सके। जांच की जिम्मेदारी मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) और अतिरिक्त जिलाधिकारियों (एडीएम) को सौंपी गई है।

वर्तमान में परिवार रजिस्टर का रखरखाव पंचायत राज (कुटुंब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली, 1970 के तहत होता है। ग्रामीण इलाकों में हर परिवार का नाम दर्ज करना अनिवार्य है। नए नाम जोड़ने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को है, जबकि अपील की सुनवाई एसडीएम करते हैं। ये सेवाएं ‘अपणी सरकार’ पोर्टल पर भी उपलब्ध हैं। लेकिन अब सरकार इस प्रक्रिया को और ज्यादा सख्त व पारदर्शी बनाने जा रही है, ताकि फर्जी दस्तावेजों से नाम जुड़ने की गुंजाइश ही खत्म हो जाए।

पंचायती राज विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सालों में परिवार रजिस्टर से जुड़े हजारों आवेदन आए, जिनमें से कई नियमों का उल्लंघन या अपूर्ण दस्तावेजों की वजह से रद्द भी हुए। सरकार का मानना है कि इससे राज्य की जनसांख्यिकी पर असर पड़ रहा है, इसलिए पुरानी गड़बड़ियों को सुधारना जरूरी है।

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Bhupendra Panwar
Bhupendra Singh Panwar is a dedicated journalist reporting on local news from Uttarakhand. With deep roots in the region, he provides timely, accurate, and trustworthy coverage of events impacting the people and communities of Uttarakhand. His work focuses on delivering verified news that meets high editorial standards and serves the public interest.
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