Chardham Yatra 2026- अगर आप हिमालय की गोद में बसे चार पवित्र धामों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा का सपना देख रहे हैं तो 2026 में आप अपने सपने को साकार कर सकते हैं। चारधाम यात्रा न सिर्फ आस्था की परीक्षा है बल्कि प्रकृति की अनोखी खूबसूरती का भी अद्भुत अनुभव है। इस बार यात्रा अक्षय तृतीया यानी 19 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है लेकिन भीड़, मौसम और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर प्लानिंग पहले से कर लेना बहुत जरूरी है।
मंदिरों के कपाट खुलने की तिथियां
उत्तराखंड सरकार और मंदिर समितियों ने चारधाम यात्रा 2026 की तारीखें पहले ही घोषित कर दी हैं जो हिंदू पंचांग और मौसम के हिसाब से तय की गई हैं। यमुनोत्री धाम 19 अप्रैल 2026 से 11 नवंबर 2026 तक खुला रहेगा। गंगोत्री धाम 19 अप्रैल 2026 से 10 नवंबर 2026 तक यात्रियों के स्वागत के लिए तैयार रहेगा। केदारनाथ धाम 22 अप्रैल 2026 से 11 नवंबर 2026 तक और बद्रीनाथ धाम 23 अप्रैल 2026 से 13 नवंबर 2026 तक खुले रहेंगे। यात्रा का सबसे अच्छा समय मई जून और सितंबर अक्टूबर का माना जाता है क्योंकि जुलाई और अगस्त में भारी बारिश और भूस्खलन का खतरा ज्यादा रहता है।
चारधाम यात्रा 2026 का पारंपरिक रूट और यात्रा कार्यक्रम
चारधाम यात्रा की शुरुआत हमेशा यमुनोत्री से शुरू होकर गंगोत्री, केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ तक होता है। ज्यादातर यात्री हरिद्वार या ऋषिकेश से अपनी यात्रा शुरू करते हैं और पूरी यात्रा सड़क मार्ग से करीब दस से बारह दिन में पूरी हो जाती है। एक सामान्य दस से ग्यारह दिन के कार्यक्रम में पहले दिन यात्री हरिद्वार या ऋषिकेश से बड़कोट पहुंचते हैं। दूसरे दिन बड़कोट से जानकी चट्टी होते हुए यमुनोत्री के दर्शन कर वापस बड़कोट या उत्तरकाशी लौट आते हैं जहां छह किलोमीटर का ट्रेक या घोड़ा पालकी का सहारा लिया जा सकता है। तीसरे दिन बड़कोट से उत्तरकाशी पहुंचकर चौथे दिन उत्तरकाशी से गंगोत्री के दर्शन कर वापस लौटना पड़ता है।
पांचवें दिन उत्तरकाशी से गुप्तकाशी या सोनप्रयाग की ओर बढ़ते हैं। छठे दिन गुप्तकाशी से गौरीकुंड होते हुए केदारनाथ पहुंचकर सोलह से अठारह किलोमीटर का ट्रेक या हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करते हैं। सातवें दिन केदारनाथ से गुप्तकाशी या रुद्रप्रयाग वापस आते हैं। आठवें दिन गुप्तकाशी से जोशीमठ होते हुए बद्रीनाथ पहुंचकर नौवें और दसवें दिन बद्रीनाथ के दर्शन कर जोशीमठ श्रीनगर होते हुए हरिद्वार या ऋषिकेश वापस लौट आते हैं।
यमुनोत्री और केदारनाथ में ट्रेकिंग जरूरी है लेकिन अगर थकान ज्यादा लगे तो पालकी घोड़ा या कंडी का प्री पेड काउंटर से इस्तेमाल किया जा सकता है। समय की कमी हो या उम्र ज्यादा हो तो देहरादून से हेलीकॉप्टर पैकेज सबसे आसान विकल्प है। रास्ते बेहद खूबसूरत लेकिन घुमावदार और ऊंचाई वाले होते हैं इसलिए अच्छी नींद हल्का खाना और पानी साथ में रखना बहुत जरूरी है।
Char Dham Yatra mein registration kaise karen?
Char Dham 2026 में बिना रजिस्ट्रेशन के यात्रा संभव नहीं है क्योंकि उत्तराखंड सरकार हर यात्री का रिकॉर्ड रखती है ताकि भीड़ नियंत्रित रहे और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। सबसे आसान तरीका ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन है। इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट https://registrationandtouristcare.uk.gov.in पर जाएं या Tourist Care Uttarakhand ऐप को डाउनलोड कर लें। वहां रजिस्टर या लॉगिन पर क्लिक करें। नया यूजर मोबाइल नंबर से साइन अप करें फिर ओटीपी वेरिफाई करके पासवर्ड बनाएं। इसके बाद क्रिएट टूर या न्यू रजिस्ट्रेशन पर जाएं जहां यात्रा की तारीख चुनें कि कौन से धाम जाएंगे और कितने लोग हैं।
हर यात्री का नाम उम्र आधार या वोटर आईडी या पासपोर्ट नंबर और फोटो भरें। सबमिट करने के बाद क्यूआर कोड वाला यात्रा पंजीकरण पत्र डाउनलोड कर लें। हर वाहन का भी रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है और यह पत्र हर धाम पर चेकिंग के लिए साथ रखना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन परिवार या टूर ऑपरेटर दोनों कर सकते हैं और यह पूरी तरह फ्री है लेकिन इसमें एक लाख रुपये तक का बीमा भी शामिल होता है। ऑफलाइन काउंटर भी हरिद्वार और ऋषिकेश में उपलब्ध हैं लेकिन ऑनलाइन करना ज्यादा सुविधाजनक है।
चार धाम यात्रा पर जाने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें
चारधाम यात्रा से पहले स्वास्थ्य का खास ध्यान रखें। अगर हाई ब्लड प्रेशर या दिल की कोई बीमारी है तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। मौसम सुबह शाम काफी ठंडा होता है इसलिए गर्म कपड़े रेनकोट और टॉर्च साथ रखें। खाने में सात्विक भोजन लें और ज्यादा चाय या कॉफी से बचें। अगर खुद प्लानिंग मुश्किल लग रही हो तो भरोसेमंद टूर ऑपरेटर से पैकेज बुक कर लें। टूरिस्ट केयर उत्तराखंड हेल्पलाइन नंबर अपने पास नोट कर रखें।
