Current Date

उत्तराखंड में भ्रष्टाचार उजागर करने वाले पत्रकार राजीव प्रताप की मौत: 10 दिन की तलाश खत्म, लेकिन सवाल बाकी

Authored by: Bhupendra Panwar
|
Published on: 30 सितम्बर 2025, 6:55 पूर्वाह्न IST
Advertisement
Subscribe
उत्तराखंड में भ्रष्टाचार उजागर करने वाले पत्रकार राजीव प्रताप की मौत:

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके उत्तरकाशी से एक दुखद खबर आई है। 18 सितंबर से लापता वरिष्ठ पत्रकार राजीव प्रताप का शव रविवार को जोशियाड़ा बैराज की झील से बरामद हो गया। 10 दिनों तक चली इस तलाश ने पूरे इलाके को हिला दिया। राजीव प्रताप एक ईमानदार पत्रकार थे, जो सरकारी अस्पताल में हो रहे भ्रष्टाचार को बेनकाब करने में जुटे हुए थे। उनकी मौत ने न सिर्फ पत्रकार बिरादरी को सदमे में डाल दिया है, बल्कि सोशल मीडिया पर न्याय की जोरदार मांग भी उठ खड़ी हुई है।

राजीव प्रताप उत्तरकाशी के एक लोकप्रिय डिजिटल मीडिया चैनल से जुड़े थे। वे स्थानीय मुद्दों पर खुलकर रिपोर्टिंग करते थे। हाल ही में उन्होंने उत्तरकाशी के एक सरकारी अस्पताल में हो रही अनियमितताओं पर सीधी नजर डाली थी। पत्रकार राजीव प्रताप की पत्नी का आरोप है कि इस रिपोर्टिंग के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थी और इसी रिपोर्टिंग के बाद वे अचानक गायब हो गए।

पत्रकार राजीव प्रताप की मौत

परिवार और साथी पत्रकारों ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन शुरुआती दिनों में कोई सुराग नहीं मिला। रविवार सुबह करीब 10:40 बजे स्थानीय लोगों ने बैराज के पास एक शव देखा, जो राजीव का निकला। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के लिए शव भेज दिया है, लेकिन मौत की वजह अभी साफ नहीं हुई। पुलिस उपाधीक्षक जनक सिंह पंवार ने बताया कि जांच जारी है। सरकार ने भी इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि क्या ये महज एक हादसा था, या भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने की सजा?

यह भी पढ़ें – Uttarkashi News: पत्रकार राजीव प्रताप चार दिनों से लापता, पत्नी ने बताया परेशान थे

सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रहा JusticeForRajivPratap

सोशल मीडिया पर इस खबर ने आग की तरह फैलाव कर दिया। ट्विटर (अब एक्स) पर #JusticeForRajivPratap ट्रेंड कर रहा है। हजारों यूजर्स ने पोस्ट शेयर कीं, जिसमें पुलिस और सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की जा रही है। एक यूजर ने लिखा, “एक और ईमानदार पत्रकार चला गया। राजीव प्रताप ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई, और बदले में क्या मिला? न्याय दो, वरना पत्रकारिता का क्या होगा?”

एक अन्य पोस्ट में कहा गया, “10 दिन लापता, फिर नदी से लाश। पुलिस को मौत का पता नहीं? ये कैसी जांच है? माफिया सक्रिय हैं, सरकार सो रही है!” फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी वीडियो और मीम्स वायरल हो रहे हैं, जो राजीव की रिपोर्टिंग के क्लिप्स दिखा रहे हैं। पत्रकार संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन की घोषणा कर दी है।

About the Author
Bhupendra Panwar
Bhupendra Singh Panwar is a dedicated journalist reporting on local news from Uttarakhand. With deep roots in the region, he provides timely, accurate, and trustworthy coverage of events impacting the people and communities of Uttarakhand. His work focuses on delivering verified news that meets high editorial standards and serves the public interest.
अगला लेख