उत्तराखंड में हाल ही में एक बड़ी खबर आई है, 147 पाकिस्तानियों और छह अफगानियों को भारतीय नागरिकता मिल गई है। ये सभी लोग सालों से यहां रह रहे थे, लेकिन अब आधिकारिक तौर पर भारत के नागरिक बन चुके हैं। ये नागरिकता नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत दी गई है, जो धार्मिक उत्पीड़न से भागकर आए लोगों को सहारा देता है। सोचिए, कितना बड़ा बदलाव होगा इन परिवारों की जिंदगी में! क्या ये फैसला और लोगों को भी उम्मीद की किरण दिखाएगा?
CAA के तहत नागरिकता प्रक्रिया कैसे हुई पूरी?
सीएए, यानी नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 में पास हुआ था। ये कानून Pakistan, Afghanistan और Bangladesh से आए Hindu, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को नागरिकता का रास्ता आसान बनाता है, बस वे 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए हों। उत्तराखंड में ये प्रक्रिया केंद्र और राज्य सरकार के गृह विभागों की सख्त जांच के बाद पूरी हुई। अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच की, और फिर मंजूरी दी।
पाकिस्तानियों और अफगानी को उत्तराखंड में नागरिकता
इस बार कुल 153 लोगों को नागरिकता मिली, जिनमें ज्यादातर हिंदू और कुछ सिख हैं। 147 पाकिस्तान से आए थे, जबकि छह अफगानिस्तान से। ज्यादातर लोग देहरादून में बसे हैं, लेकिन कुछ हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल और उत्तरकाशी में भी रहते हैं। क्या आपको पता है, ये लोग सालों से यहां मजदूरी या छोटे-मोटे काम करके गुजारा कर रहे थे? अब नागरिकता मिलने से उनकी जिंदगी में स्थिरता आएगी। इनमें से कई लोग धार्मिक उत्पीड़न की वजह से अपने देश छोड़कर आए। पाकिस्तान से आए एक परिवार के सदस्य ने बताया, “हमारे लिए वहां रहना मुश्किल हो गया था। भारत आकर शांति मिली, लेकिन नागरिकता के बिना जिंदगी अधर में लटकी थी।”
इस नागरिकता से उत्तराखंड में क्या बदलाव आएगा? सबसे पहले, ये लोग अब पूरी तरह से भारतीय बन चुके हैं। वे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे। राज्य सरकार ने इन्हें पांच विशेष अधिकार दिए हैं, जैसे वोटिंग राइट, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन, बैंक अकाउंट में आसानी वगैरह। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा, क्योंकि ये लोग अब बिना डर के निवेश कर सकेंगे।