उत्तराखंड की धामी सरकार का कैबिनेट विस्तार आज शुक्रवार को हो सकता है। मीडिया रिपोर्टों के हवाले से खबर है कि राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। क्या आज ही नए मंत्रियों के नाम सामने आ जाएंगे? यह सवाल पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है। अगर विस्तार हुआ तो कैबिनेट में 5 नए चेहरों को जगह मिल सकती है, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल और देहरादून से एक-एक।
धामी सरकार का कैबिनेट विस्तार और शपथ समारोह
सूत्र बता रहे हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले कुछ दिनों से लगातार बैठकें की हैं। शासन स्तर पर हलचल तेज है और राजभवन की ओर से भी हर संभव तैयारी की जा रही है। कल तक अटकलें थीं कि विस्तार कुछ दिन टल सकता है, लेकिन अब लग रहा है कि आज ही मौका आ गया है।
आप भी सोच रहे होंगे कि इतनी जल्दी फैसला क्यों? वजह साफ है, सरकार को मजबूत बहुमत और हर जिले का प्रतिनिधित्व चाहिए। सूत्र कहते हैं कि आज दोपहर या शाम तक शपथ ग्रहण हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह धामी सरकार का दूसरा बड़ा कैबिनेट विस्तार होगा।
इन विधायकों का हो सकता नाम
खास बात यह है कि नए मंत्रियों का चयन जिला-वार हो रहा है। हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल और देहरादून, इन पांच जिलों से एक-एक विधायक को कैबिनेट में जगह मिलने की संभावना है। पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि इन जिलों में पिछले चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने वाले नेताओं पर विचार चल रहा है। हालांकि अभी नामों की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अंदरूनी चर्चा में ये पांच जिले सबसे ऊपर हैं। क्या इनमें से कोई महिला नेता भी शामिल होगी? यह सवाल भी कार्यकर्ताओं के बीच घूम रहा है।
पिछले साल से चल रही कैबिनेट विस्तार की अटकलें!
धामी सरकार बनने के बाद से ही कैबिनेट विस्तार की मांग जोरों पर थी। कई विधायक लंबे समय से दावेदारी कर रहे थे। विकास कार्यों को तेज करने और हर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी माना जा रहा था। पिछले कुछ महीनों में सीएम धामी ने कई दौरों में यह संकेत भी दिए थे कि जल्द ही टीम को और मजबूत किया जाएगा। अब लग रहा है कि वह वक्त आ गया है। राजभवन से लेकर पार्टी ऑफिस तक सब कुछ इस खबर पर अटका हुआ है।
अगर आज विस्तार हुआ तो सरकार की कार्यशैली और तेज हो जाएगी। नए मंत्री अपने-अपने जिलों के लंबे लंबित प्रोजेक्ट्स को गति दे सकेंगे। खासकर पर्यटन, सड़क और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में फायदा दिख सकता है। राजनीतिक रूप से भी यह भाजपा के लिए अच्छा संदेश होगा। विपक्ष पहले से ही सवाल उठा रहा था कि सरकार क्यों इतनी छोटी टीम के साथ चल रही है। अब यह दबाव भी कम हो सकता है।













