Uttarakhand news: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने दूसरे कार्यकाल के चार साल पूरे कर लिए हैं। 23 मार्च 2026 को परेड ग्राउंड में ‘जन-जन की सरकार, चार साल बेमिसाल’ कार्यक्रम में उन्होंने खुद रिपोर्ट कार्ड पेश किया। सवाल ये है कि क्या धामी अब उत्तराखंड के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बनेंगे, जिन्होंने पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा किया? क्योंकि राज्य के 25 साल के इतिहास में ऐसा अभी तक किसी भाजपा सीएम के साथ नहीं हुआ।
उत्तराखंड में सीएम बदलने की पुरानी परंपरा टूटी?
उत्तराखंड बनने के बाद से अब तक आठ-नौ मुख्यमंत्री बदल चुके हैं। कांग्रेस के नारायण दत्त तिवारी ही एकमात्र ऐसे सीएम रहे, जिन्होंने पूरा पांच साल का टर्म किया। भाजपा की सरकारों में त्रिवेंद्र रावत, तीरथ सिंह रावत या रमेश पोखरियाल जैसे नेता आए, लेकिन कोई पूरे टर्म तक नहीं टिक सका। धामी 2021 में पहली बार सीएम बने, फिर 2022 के चुनाव के बाद दोबारा शपथ ली। अब चार साल बाद वे न सिर्फ सबसे लंबे समय तक सत्ता में टिके भाजपा सीएम बन गए हैं, बल्कि 2027 के चुनाव तक टिके तो इतिहास रच देंगे।
कार्यक्रम में धामी ने कहा, “देवभूमि का गौरव वापस लौट रहा है।” राजनाथ सिंह समेत कई केंद्रीय नेताओं ने भी इस उपलब्धि पर बधाई दी। लेकिन विपक्ष पूछ रहा है क्या ये सिर्फ चार साल का जश्न है या असली बदलाव?
धामी सरकार की बड़ी उपलब्धियां
इन चार सालों में सबसे चर्चित फैसला रहा समान नागरिक संहिता (UCC) का लागू होना। उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जहां UCC लागू हुआ। इसके अलावा सशक्त भू-कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून और नकलरोधी कानून भी बने। मदरसा बोर्ड खत्म कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाया गया। 12 हजार एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाया गया।
महिलाओं के लिए भी कम नहीं किया। सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी। 2.54 लाख से ज्यादा महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। स्वयं सहायता समूहों को बिना ब्याज पांच लाख तक का ऋण मिल रहा है। मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना चली।
विकास के आंकड़ों पर एक नजर
धामी सरकार ने 4332 घोषणाएं कीं। इनमें से 2444 पूरी हो चुकी हैं, 417 पर काम चल रहा है और 345 को वापस लेना पड़ा। लोक निर्माण, शिक्षा और सिंचाई विभाग में सबसे ज्यादा घोषणाएं प्रभावित हुईं। लेकिन सकारात्मक पहलू भी कम नहीं। 30 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरियां मिलीं। नकलरोधी कानून से परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ी।
अर्थव्यवस्था डेढ़ गुना बढ़ गई। निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन और शिक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनी। 74 योजनाओं का 401 करोड़ रुपये का लोकार्पण, शिलान्यास भी हुआ। कार्यक्रम में धामी ने कहा, “ये चार साल विकास और विरासत के रहे।”
क्या पुष्कर धामी बनेंगे भाजपा के पहले मुख्यमंत्री
अब एक साल बाकी है। कुम्भ की तैयारियां जोरों पर हैं। अगर विकास की रफ्तार बनी रही और पार्टी में कोई अंदरूनी खींचतान नहीं हुई, तो धामी आसानी से पूरा टर्म कर सकते हैं। जनता का मूड भी सकारात्मक दिख रहा है। पर चुनौतियां भी हैं, बेरोजगारी, पलायन और पहाड़ी इलाकों का विकास।
चार साल बेमिसाल रहे, ये तो तय है। लेकिन असली परीक्षा 2027 में होगी। अगर पुष्कर सिंह धामी पूरे टर्म तक टिके तो वे उत्तराखंड के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बन जाएंगे, जिन्होंने ‘स्थिर सरकार’ का वादा पूरा किया। फिलहाल जश्न का माहौल है, लेकिन सड़क पर आम आदमी पूछ रहा है “अब अगले साल क्या होगा?” वक्त बताएगा।













