क्या आपने हाल ही में अपना घरेलू गैस सिलेंडर बुक करने की कोशिश की है? अगर हां, तो शायद आपको एक नई दिक्कत का सामना करना पड़ा होगा। मिडल ईस्ट में चल रहे संकट की वजह से एलपीजी सप्लाई पर असर पड़ा है, और सरकार ने होर्डिंग रोकने के लिए घरेलू गैस सिलेंडर बुकिंग के नियम बदल दिए हैं। अब बुकिंग का इंतजार 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। साथ ही, कमर्शियल एलपीजी कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है, जो आम घरों को परोक्ष रूप से प्रभावित कर सकती है। ये बदलाव मार्च 2026 से लागू हो चुके हैं, और लाखों उपभोक्ताओं की जिंदगी पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
मिडल ईस्ट संकट का भारत पर असर
सोचिए, एक छोटा-सा क्षेत्रीय संकट कैसे हमारे रसोईघर तक पहुंच जाता है? पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने एलपीजी आयात को प्रभावित किया है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है, और इस संकट से सप्लाई चेन बिगड़ गई। नतीजा? पैनिक बुकिंग बढ़ गई, लोग डर के मारे ज्यादा सिलेंडर स्टॉक करने लगे। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जहां पहले लोग 55 दिनों में बुकिंग करते थे, अब 15 दिनों में ही कर रहे हैं। इसी होर्डिंग को रोकने के लिए सरकार ने इमरजेंसी पावर इस्तेमाल करते हुए रिफाइनरीज को एलपीजी प्रोडक्शन बढ़ाने के आदेश दिए। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों ने सॉफ्टवेयर में बदलाव कर दिए, ताकि समय से पहले बुकिंग न हो सके।
घरेलू गैस सिलेंडर बुकिंग के नए नियम क्या हैं?
अब आते हैं मुख्य बदलाव पर। पहले, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी के बाद 21 दिनों का लॉक-इन पीरियड था, लेकिन अब इसे 25 दिनों तक बढ़ा दिया गया है। मतलब, अगर आपका सिलेंडर आज डिलीवर हुआ, तो अगला बुकिंग 25 दिन बाद ही कर पाएंगे। सिंगल बॉटल वाले उपभोक्ताओं के लिए ये 21 दिनों से शुरू हुआ था, लेकिन डबल बॉटल वालों को 30 दिनों तक इंतजार करना पड़ सकता है। कमर्शियल सिलेंडर (19 किलो वाले) की सप्लाई भी सीमित कर दी गई है, और उनकी कीमतों में मार्च 2026 से बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर की कीमतें अभी स्थिर हैं, लेकिन अगर संकट लंबा चला तो LPG price में और उछाल आ सकता है। ऑनलाइन बुकिंग ऐप्स और IVRS सिस्टम में ये बदलाव लागू हो चुके हैं, तो अगर आप कोशिश करेंगे तो सिस्टम खुद रिजेक्ट कर देगा।
आम परिवारों और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
ये नए नियम सुनने में सख्त लगते हैं, लेकिन क्या ये वाकई जरूरी हैं? बड़े परिवारों के लिए ये मुश्किल साबित हो सकता है, क्योंकि महीने में एक सिलेंडर से काम नहीं चलता। कल्पना कीजिए, अगर आपका गैस 20 दिनों में खत्म हो गया, तो अगले 5 दिनों तक क्या करेंगे? कई लोग वैकल्पिक ईंधन जैसे इंडक्शन या केरोसिन की तरफ मुड़ सकते हैं। छोटे रेस्टोरेंट और होटलों पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि कमर्शियल LPG price बढ़ने से उनके खर्चे बढ़ेंगे, जो आखिरकार ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। हालांकि, सरकार का कहना है कि ये कदम सप्लाई को स्टेबल रखने के लिए हैं, और रिफाइनरीज से ज्यादा प्रोडक्शन से जल्दी हालात सुधरेंगे। भारत में करीब 33 करोड़ एलपीजी उपभोक्ता हैं, तो ये बदलाव करोड़ों घरों को छू रहा है।
अब आगे क्या होगा ?
फिलहाल, ये नियम अस्थायी लगते हैं, लेकिन अगर मिडल ईस्ट का संकट गहराया तो LPG price में और बदलाव आ सकते हैं। सरकार को घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर फोकस करना चाहिए। क्या आप तैयार हैं ऐसे बदलावों के लिए? उम्मीद है कि जल्दी हालात सामान्य होंगे, और गैस बुकिंग फिर से आसान हो जाएगी। तब तक, ईंधन का समझदारी से इस्तेमाल करें, ताकि सबको हिस्सा मिले।













