उत्तराखंड के पहाड़ों से शिक्षा को लेकर एक बेहद सकारात्मक खबर सामने आ रही है। क्या आपने कभी सोचा है कि जब एक होनहार छात्र को पैसों की तंगी के चलते अपनी पढ़ाई बीच में रोकनी पड़ती है, तो उस पर क्या बीतती है? इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए, उत्तराखंड में धामी सरकार ने छात्रों को एक बड़ा तोहफा दिया है। राज्य के 21 हजार से अधिक मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति की सौगात मिली है। यह कदम न सिर्फ युवाओं के सपनों को नई उड़ान देगा, बल्कि राज्य में शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने में भी मील का पत्थर साबित होगा।
सीएम पुष्कर सिंह धामी का विजन
याद कीजिए वो वक्त जब कई मेधावी छात्र सिर्फ इसलिए कॉलेज का मुंह नहीं देख पाते थे क्योंकि उनके पास फीस भरने या किताबें खरीदने के पैसे नहीं होते थे। उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में तो उच्च शिक्षा हासिल करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। इसी दर्द को समझते हुए, सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक ठोस कदम उठाने का फैसला किया।
आजकल न्यूज में छाई यह स्कॉलरशिप योजना उन छात्रों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है, जो आर्थिक तंगी के कारण अपने कदम पीछे खींच लेते थे। सरकार का साफ मानना है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होनी चाहिए, खासकर पैसों की तो बिल्कुल नहीं।
उत्तराखंड में 21000 छात्रों को छात्रवृत्ति
हालिया सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 21,000 से अधिक छात्र-छात्राओं को इस योजना के तहत सीधे उनके बैंक खातों में छात्रवृत्ति (Scholarship) ट्रांसफर की गई है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें कोई बिचौलिया नहीं है और न ही दफ्तरों के चक्कर काटने की कोई लंबी लाइन। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा गया है। क्या आपको नहीं लगता कि जब बिना किसी झंझट के सीधे खाते में पैसे आते हैं, तो छात्र और उसके परिवार को एक अलग ही राहत मिलती है?
क्या वाकई बदलेगी तस्वीर?
धामी सरकार का यह कदम केवल एक हजार या दो हजार रुपये की आर्थिक मदद भर नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा मानसिक हौसला है। जब एक होनहार छात्र को यह भरोसा होता है कि सिस्टम उसके साथ खड़ा है, तो उसका पूरा ध्यान सिर्फ अपनी किताबों और करियर पर होता है। इससे राज्य में उच्च शिक्षा (Higher Education) का एनरोलमेंट रेश्यो (नामांकन दर) तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का मनोबल भी इससे काफी ऊंचा होगा।
संक्षेप में कहें तो, उत्तराखंड में धामी सरकार का छात्रों को दिया गया यह तोहफा आने वाले कल के लिए एक बेहतरीन निवेश है। आज जिन 21 हजार से अधिक छात्रों को यह छात्रवृत्ति मिली है, कल वही युवा डॉक्टर, इंजीनियर या अफसर बनकर राज्य का नाम रोशन करेंगे। भविष्य की संभावनाओं को देखें तो उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार आने वाले समय में इस योजना का दायरा और बढ़ाएगी। ताकि पिथौरागढ़ या चमोली के किसी दूर-दराज गांव में बैठा कोई भी बच्चा, सिर्फ इसलिए शिक्षा से वंचित न रहे क्योंकि उसके पास पैसे नहीं थे।













