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सिर्फ रात में खिलता है ब्रह्मकमल! जानिए उत्तराखंड के राज्य फूल की अनसुनी कहानी

Authored by: Bhupendra Panwar
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Published on: 18 February 2026, 7:49 am IST
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उत्तराखंड का राज्य फूल ब्रह्मकमल: हिमालय की वो दुर्लभ धरोहर जो रात में खिलकर सबको हैरान कर देती है

क्या आपने कभी सोचा है कि उत्तराखंड का राज्य फूल कौन सा है? देवभूमि कहे जाने वाले इस राज्य की पहचान सिर्फ ऊंचे पहाड़, नदियां और मंदिर ही नहीं, बल्कि एक ऐसा फूल भी है जो बेहद दुर्लभ और पवित्र माना जाता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं ब्रह्मकमल की। उत्तराखंड का राज्य फूल ब्रह्मकमल को इसलिए चुना गया क्योंकि ये हिमालय की ऊंची चोटियों का असली राजा है। ये फूल न सिर्फ खूबसूरती का प्रतीक है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है।

आखिर कहां पाया जाता है उत्तराखंड का राज्य फूल?

ब्रह्मकमल का वैज्ञानिक नाम है सॉसुरिया ओब्वालाटा। ये हिमालय की ऊंचाई पर, करीब 3,500 से 4,800 मीटर के बीच खिलता है। उत्तराखंड में इसे वॅली ऑफ फ्लावर्स, हेमकुंड साहिब, केदारनाथ, रूपकुंड और बेदनी बुग्याल जैसे इलाकों में देखा जा सकता है। खास बात ये कि ये फूल दिन में बंद रहता है और रात में ही खिलता है। सुबह होते ही फिर बंद हो जाता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि इसे देखना सौभाग्य की बात होती है।

धार्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक महत्व

ब्रह्मकमल का नाम ही इसके महत्व को बयान कर देता है। मान्यता है कि ये भगवान ब्रह्मा का कमल है। पौराणिक कथाओं में कहा जाता है कि ये फूल भगवान शिव को बहुत प्रिय है। केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे मंदिरों में पूजा के दौरान इसका इस्तेमाल होता है। कई जगहों पर इसे प्रसाद के रूप में भी बांटा जाता है।

औषधीय गुण और संरक्षण की चुनौतियां

ब्रह्मकमल सिर्फ देखने में सुंदर नहीं, इसके औषधीय गुण भी कमाल के हैं। आयुर्वेद में इसे बुखार, खांसी, घाव और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन यही वजह से लोग इसे ज्यादा तोड़ते हैं, जिससे ये खतरे में पड़ गया है। जलवायु परिवर्तन भी बड़ा खतरा है। ऊंचाई पर तापमान बढ़ने से इसके खिलने का समय बदल रहा है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट्स बताती हैं कि कई इलाकों में इसकी संख्या तेजी से घटी है। सरकार ने इसे संरक्षित घोषित किया है, लेकिन अभी और सख्त कदमों की जरूरत है।

सांस्कृतिक विरासत का जीता-जागता उदाहरण

उत्तराखंड का राज्य फूल ब्रह्मकमल हमारी प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का जीता-जागता उदाहरण है। अगर हमने इसे बचाया नहीं तो आने वाली पीढ़ियां सिर्फ किताबों में ही इसे देख पाएंगी। पर्यटन को बढ़ावा देते हुए संरक्षण पर भी ध्यान देना होगा। अगली बार जब आप उत्तराखंड घूमने जाएं, तो इन ऊंची वादियों में ब्रह्मकमल को देखने की कोशिश जरूर करें। शायद आपको वो सौभाग्य मिल जाए, जिसकी लोग सदियों से बात करते आए हैं।

About the Author
Bhupendra Panwar
Bhupendra Singh Panwar is a dedicated journalist reporting on local news from Uttarakhand. With deep roots in the region, he provides timely, accurate, and trustworthy coverage of events impacting the people and communities of Uttarakhand. His work focuses on delivering verified news that meets high editorial standards and serves the public interest.
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