पीएम मोदी ने ट्रंप के फोन को ठुकराया, भारत ने 50% टैरिफ दबाव को किया खारिज
जर्मनी के प्रमुख अखबार *फ्रैंकफर्टर आलगेमाइने साइटुंग (FAZ)* ने अपनी ताजा रिपोर्ट में दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल उनके दबाव को खारिज किया, बल्कि उनके फोन कॉल तक का जवाब देना उचित नहीं समझा। अखबार ने अपनी हेडलाइन में लिखा, “Trump calls, but Modi doesn’t answer यानी “ट्रंप कॉल करते हैं, मगर मोदी जवाब नहीं देते।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने हाल के महीनों में चीन, कनाडा, मैक्सिको और यूरोपीय संघ जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों पर कड़े आयात शुल्क लगाए। इनमें से अधिकांश देशों ने या तो समझौता कर लिया या दबाव में आकर पीछे हट गए। हालांकि, भारत ने इस मामले में एकदम अलग और सख्त रुख अपनाया। पीएम मोदी ने अमेरिका की ओर से आयात शुल्क कम करने या व्यापारिक रियायतें देने की मांग को स्पष्ट रूप से ठुकरा दिया।
ट्रंप ने मोदी को किया फोन
FAZ ने लिखा कि ट्रंप की रणनीति हमेशा टकराव और दबाव की रही है। वह बातचीत के बजाय धमकी भरे लहजे का इस्तेमाल करते हैं। जहां कई देशों ने इस रणनीति के सामने झुककर रास्ता निकाला, वहीं भारत ने अपने घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए ट्रंप की चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया।
भारत की राजनीति ताकत में इजाफा
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत का यह रुख न केवल उसकी आर्थिक नीतियों की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि दक्षिण एशिया में उसकी बढ़ती राजनीतिक ताकत का भी प्रतीक है। भारत अच्छी तरह जानता है कि एशिया में चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए अमेरिका को उसकी जरूरत है। यही कारण है कि भारत ने व्यापारिक मोर्चे पर अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
अखबार ने यह भी रेखांकित किया कि मोदी सरकार का यह आत्मविश्वास वैश्विक मंच पर भारत की नई पहचान को दर्शाता है। भारत अब उस पारंपरिक छवि से बाहर निकल चुका है, जिसमें उसे विकसित देशों के दबाव में आसानी से झुकने वाला माना जाता था। इसके बजाय, भारत अब अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य एशियाई देशों के साथ संतुलित और मजबूत साझेदारी विकसित कर रहा है।
यह घटनाक्रम वैश्विक व्यापार और कूटनीति में भारत की बढ़ती हैसियत को रेखांकित करता है। जहां ट्रंप की नीतियां कई देशों पर हावी रही हैं, वहीं भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने हितों से समझौता करने को तैयार नहीं है।