क्या आप लॉ स्टूडेंट हैं? या आपके घर में कोई कानून की पढ़ाई कर रहा है? तो ये खबर आपके लिए गेम-चेंजर है। कल ही दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो सालों से चली आ रही अटेंडेंस की सख्ती को धक्का दे देगा। अब कम क्लास अटेंड करने पर भी आप परीक्षा की सीढ़ी चढ़ सकेंगे। लेकिन ये फैसला कैसे आया? आइए, सरल शब्दों में समझते हैं पूरी कहानी।
भारत में लॉ कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स के लिए अटेंडेंस 75% से ज्यादा जरूरी मानी जाती है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों के मुताबिक, अगर क्लास मिस हो गईं, तो परीक्षा का टिकट कट जाता है। लेकिन ये नियम कितने सख्त हैं, ये समझिए, 2016 में एक स्टूडेंट, रोहिल्ला ने अटेंडेंस पूरी न होने पर आत्महत्या कर ली थी। उस दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। तब से ये बहस चल रही थी कि क्या पढ़ाई सिर्फ क्लासरूम में कैद हो?
दिल्ली हाईकोर्ट ने अब इस बहस को विराम दिया है। जस्टिस यशवंत वर्मा और जस्टिस अफशर खान की बेंच ने कहा, “कानूनी शिक्षा सिर्फ रट्टा मारना नहीं है। स्टूडेंट्स को प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस भी मिलना चाहिए। सख्त अटेंडेंस नियमों से तनाव बढ़ता है, जो कभी-कभी जानलेवा साबित होता है।”
हाईकोर्ट ने साफ-साफ निर्देश दिए हैं कि यदि कोई भी लॉ स्टूडेंट कम अटेंडेंस की वजह से परीक्षा से बाहर नहीं किया जा सकता। अगले सेमेस्टर में प्रमोशन भी रुकेगा नहीं। इसके अलावा BCI को नियमों में बदलाव करना होगा। न्यूनतम अटेंडेंस को 40% तक घटाया जा सकता है। बाकी वजन इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल वर्क को दिया जाएगा।
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कोर्ट ने BCI को कहा है कि वो एक लिस्ट जारी करे, जहां स्टूडेंट्स को अच्छी इंटर्नशिप के ऑप्शन्स मिलें। इससे क्लास के अलावा रियल-वर्ल्ड लर्निंग बढ़ेगी। सभी लॉ कॉलेजों को ये नियम फॉलो करने होंगे। BCI को तीन महीने में नई गाइडलाइंस तैयार करनी हैं। ये फैसला सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। ये पूरे देश के लॉ स्टूडेंट्स के लिए लागू होगा, क्योंकि BCI नेशनल बॉडी है।
स्टूडेंट्स के लिए क्या फायदा?
सोचिए, अब आप कॉलेज की क्लासेस के चक्कर में फंसने की बजाय कोर्ट में जाकर केस देख सकेंगे। या किसी NGO के साथ काम करके सोशल जस्टिस सीख सकेंगे। ये बदलाव स्टूडेंट्स को ज्यादा फ्रीडम देगा, लेकिन जिम्मेदारी भी बढ़ाएगा। कोर्ट ने चेतावनी दी है – इंटर्नशिप भी सही से करनी पड़ेगी, वरना वो भी गिनी जाएगी।
दिल्ली हाईकोर्ट का ये फैसला कानूनी शिक्षा को ज्यादा इंसानी और प्रैक्टिकल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। BCI अब जल्दी से नए नियम लाएगा, और हो सकता है कि आने वाले महीनों में और बदलाव देखने को मिलें। अगर आप लॉ स्टूडेंट हैं, तो अपनी यूनिवर्सिटी से अपडेट लेते रहें।
This post was last modified on नवम्बर 4, 2025 7:07 पूर्वाह्न
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