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उत्तराखंड को बदनाम करने की साज़िश: बद्रीनाथ के पुजारी पर लगाए गंभीर आरोप

Authored by: Bhupendra Panwar
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Published on: 17 मई 2025, 11:00 पूर्वाह्न IST
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उत्तराखंड को बदनाम करने की साज़िश: बद्रीनाथ के पुजारी पर लगाए गंभीर आरोप

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक व्यक्ति उत्तराखंड और इसके लोगों को बदनाम करने वाले बयान दे रहा है। इस वीडियो में दावा किया गया है कि बद्रीनाथ के मुख्य पुजारी पहले शराब पीते हैं, फिर तिलक लगाते हैं, और यहां शराब पीने की परंपरा है। इसके अलावा, यह भी कहा गया है कि माता-पिता 15-16 साल के बच्चों को शराब पीने के लिए खर्चा देते हैं, और कोई मर जाता है तो लोग बिना शराब पिए अर्थी को कंधा नहीं देते। ये बयान न केवल उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को गलत तरीके से पेश करते हैं, बल्कि राज्य की छवि को भी गंभीर रूप से धूमिल करने का प्रयास करते हैं।

वीडियो में दिखाए गए व्यक्ति ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जो न केवल तथ्यहीन हैं, बल्कि उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने वाले हैं। उदाहरण के लिए, बद्रीनाथ धाम जैसे पवित्र स्थल को शराब से जोड़ना एक ऐसी बात है, जो किसी भी रूप में सही नहीं हो सकती। उत्तराखंड के लोगों और यहां के पुजारियों की सेवा और समर्पण की परंपरा सदियों से चली आ रही है, और ऐसे बयान इन परंपराओं को कलंकित करने का प्रयास हैं।

उत्तराखंड को बदनाम करने की साज़िश

इस वीडियो के वायरल होने के बाद, सोशल मीडिया पर व्यापक आलोचना हुई है। कई उपयोगकर्ताओं ने इस व्यक्ति की पहचान और मंशा पर सवाल उठाए हैं। कुछ का मानना है कि यह एक सोची-समझी साजिश है, जिसका उद्देश्य उत्तराखंड को बदनाम करना और यहां की धार्मिक परंपराओं को नुकसान पहुंचाना है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस तरह के बयानों की कड़ी निंदा की है और मांग की है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

कड़ी कार्रवाई की मांग

सोशल मीडिया पर इस वीडियो के खिलाफ व्यापक आक्रोश देखने को मिला है। कई लोगों ने उत्तराखंड पुलिस और सरकार से मांग की है कि इस मामले की जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। यह आवश्यक है कि ऐसे बयानों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत की रक्षा की जा सके।

उत्तराखंड को “देवभूमि” के रूप में जाना जाता है, और यहां की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराएं देश-दुनिया में सम्मान की नजर से देखी जाती हैं। चार धाम, हेमकुंड साहिब, और अन्य तीर्थस्थल हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। इन स्थानों की पवित्रता और यहां के लोगों की सेवा भावना को ध्यान में रखते हुए, ऐसे बयान न केवल अपमानजनक हैं, बल्कि इनकी साख को भी चुनौती देते हैं।

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उत्तराखंड को बदनाम करने वाले ऐसे बयान न केवल तथ्यहीन हैं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा भी हो सकते हैं। यह राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए, यह आवश्यक है कि ऐसे बयानों के खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि उत्तराखंड की छवि और उसकी परंपराओं की रक्षा की जा सके। देवभूमि की पवित्रता और यहां के लोगों की सेवा भावना को बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।

About the Author
Bhupendra Panwar
Bhupendra Singh Panwar is a dedicated journalist reporting on local news from Uttarakhand. With deep roots in the region, he provides timely, accurate, and trustworthy coverage of events impacting the people and communities of Uttarakhand. His work focuses on delivering verified news that meets high editorial standards and serves the public interest.
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