जोशीमठ और सोनप्रयाग तक पहुंचाई जाएगी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन

2013 में केदारनाथ आपका के बाद केदारनाथ पुनर्निर्माण (Kedarnath Redevelopment) और विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने प्रधान मंत्री मोदी का धन्यवाद ज्ञापन किया है। सीएम तीरथ रावत ने कहा कि  ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन (Rishikesh-Karnprayag railway line ) को जोशीमठ और सोनप्रयाग तक ले जाने तक की योजना है।‌

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केदारनाथ आपदा को आज 8 साल हो चुके हैं। आपदा के कुछ साल तो केदारनाथ को लेकर लोगों के मन में डर बैठा हुआ था। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके नेतृत्व में केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण कार्य की शुरुवात हुई थी। इसमें काफी समय लगा और यह अभी भी चल ही रहा है। अब सारे श्रद्धालु गण केदारनाथ जाना चाहते हैं।

लेकिन वर्तमान की जानकारी के अनुसार अब उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) के निर्देशों के बाद ही चार धाम यात्रा खोली जाएगी।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने बताया कि पुनर्निर्माण के बाद केदारपुरी का नया स्वरूप निखर कर सामने आ रहा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मन्दिर के चारों ओर चौड़े पारपथ बनाए गए हैं। त्रिस्तरीय सुरक्षा दीवार निर्माण कराया गया है, मंदिर के आसपास तीर्थ पुरोहितों और यात्रियों के लिए नए आवासीय भवन बनाए गए हैं।

सीएम ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के विज़न के अनुरूप ही केंद्र सरकार द्वारा उत्तराखण्ड में पवित्र चार धाम यात्रा हेतु आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ऋषिकेश से चारों धामों के लिए ऑल वेदर रोड बनाई जा रही है जिससे स्थानीय नागरिकों को भी अपार लाभ मिलेगा।

तेजी से चल रहा ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन का कार्य

यूं तो सोनप्रयाग (Sonprayag) तक रेल पहुंचने की बात बहुत पहले से ही चल रही थी लेकिन आज मुख्यमंत्री ने इस बात के संकेत भी दे दिए हैं। उनने बताया कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन ( Rishikesh-Karnprayag railway line ) का कार्य त्वरित गति से चल रहा है। आगे इसी लाइन को जोशीमठ (Joshimath) और सोनप्रयाग (Sonprayag) तक ले जाने की भी योजना है। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम को भी डोईवाला से रेल लाइन के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इनके पूरा होने से पर्वतीय क्षेत्र की जनता को भी अभूतपूर्व लाभ होगा।

आपको बता दें कि कर्णप्रयाग से, जो कि फिलहाल के लिए अनुमानित अंतिम स्टेशन है, बद्रीनाथ (Badrinath) धाम की दूरी 120 किलोमीटर से ज्यादा है। यदि रेल जोशीमठ तक पहुंच जाती है तो यह दूरी मात्र 45 किलोमीटर रह जायेगी।

यदि जोशीमठ से सोनप्रयाग तक रेल पहुंचाई जाती है तो सोनप्रयाग से केदारनाथ (Kedarnath) धाम तक की दूरी लगभग 20 किलोमीटर ही रह जायेगी।

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